तबीयत में तल्खी  –  मुक्तक 

​

थोड़ी तल्खी भी तबीयत में बहुत लाजमी है,..
लोग पी जाते, जो समन्दर  खारा न होता..

Anonymous.

तकलीफ –  कविता 

किसी की तकलीफ कम ना कर सको कोई बात नहीँ.

पर दर्द और तकलीफ बढ़ाओ भी नहीँ ,

 तब भी बड़ी दुआ मिल  जायेगी.

एक प्यारी सी मुस्कान ही जिंदगी जीने का 

हौसला दे जायेगी.

मृत अतीत – कविता 

मृत, कटु अतीत  , यादों का बोझ

स्मृतियों की निष्ठुरता

अक्सर बङी भारी होती है।

इनके वज़न तले दबे रहने से

अच्छा है, इस घुटन से निकल

इन्द्रधनुष के सात रंगों में  जीवन जीना।

खुशबू – कविता 

​सब कुछ सँवारते-खुशबू बँटते रहने वालों को  बिखरते देखा है।

पर कांटों के बीच फूलों  का भी तो यही हश्र होते देखा है।

तकलीफ –  कविता 

Rekha Sahay's avatarThe REKHA SAHAY Corner!

किसी की तकलीफ कम ना कर सको कोई बात नहीँ.

पर दर्द और तकलीफ बढ़ाओ भी नहीँ ,

तब भी बड़ी दुआ मिल जायेगी.

एक प्यारी सी मुस्कान ही जिंदगी जीने का

हौसला दे जायेगी.

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हिना – कविता

हमने तो जिंदगी को कभी ना जाँचा ना परखा ना इम्तहान लिया,

फिर यह क्यों रोज़ नये इम्तहान लेती,  परखती रहती है?

सोने की तरह कसौटी पर कस कर अौर कभी

पत्थर पर घिस कर हिना बना हीं ङालेगी  शायद।

कहते हैं

रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद ……..

जिंदगी के रंग, कविता -18

If you want to hold beautiful one

Hold yourself to yourself.
​इक उम्र बीत गई जिंदगी जीते हुए .

पर उलझने आज भी उलझाती है .

या तो हमें  जिंदगी  जीना नहीँ आया .

या जिंदगी ने ठीक से सबक नहीँ सिखाया.

या रोज़ नये नये सबक ले कर

 नये रंग दिखाती है जिंदगी …..

 बंद किताबो के रिश्ते – कविता 

खुले आसमान के नीचे हम  इतनी बँद बँद जिंदगी  क्यों  जीते है ?

ठीक वैसे जैसे कुछ रिश्ते बंद किताबों में होते है. 

अपने आप से खुल कर बाते करो 

दिलो – दिमाग पर छाये तूफान को बस गुजर जाने दो….

तकलीफ –  कविता 

किसी की तकलीफ कम ना कर सको कोई बात नहीँ.

पर दर्द और तकलीफ बढ़ाओ भी नहीँ ,

 तब भी बड़ी दुआ मिल  जायेगी.

एक प्यारी सी मुस्कान ही जिंदगी जीने का 

हौसला दे जायेगी.

मृत अतीत –  कविता 


मृत, कटु अतीत  , यादों का बोझ

स्मृतियों की निष्ठुरता

अक्सर बङी भारी होती है।

इनके वज़न तले दबे रहने से

अच्छा है, इस घुटन से निकल

इन्द्रधनुष के सात रंगों में  जीवन जीना।