
सब कुछ सँवारते-खुशबू बँटते रहने वालों को बिखरते देखा है।
पर कांटों के बीच फूलों का भी तो यही हश्र होते देखा है।
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!

सब कुछ सँवारते-खुशबू बँटते रहने वालों को बिखरते देखा है।
पर कांटों के बीच फूलों का भी तो यही हश्र होते देखा है।
किसी की तकलीफ कम ना कर सको कोई बात नहीँ.
पर दर्द और तकलीफ बढ़ाओ भी नहीँ ,
तब भी बड़ी दुआ मिल जायेगी.
एक प्यारी सी मुस्कान ही जिंदगी जीने का
हौसला दे जायेगी.
हमने तो जिंदगी को कभी ना जाँचा ना परखा ना इम्तहान लिया,
फिर यह क्यों रोज़ नये इम्तहान लेती, परखती रहती है?
सोने की तरह कसौटी पर कस कर अौर कभी
पत्थर पर घिस कर हिना बना हीं ङालेगी शायद।
कहते हैं
रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद ……..

If you want to hold beautiful one
Hold yourself to yourself.
इक उम्र बीत गई जिंदगी जीते हुए .
पर उलझने आज भी उलझाती है .
या तो हमें जिंदगी जीना नहीँ आया .
या जिंदगी ने ठीक से सबक नहीँ सिखाया.
या रोज़ नये नये सबक ले कर
नये रंग दिखाती है जिंदगी …..

खुले आसमान के नीचे हम इतनी बँद बँद जिंदगी क्यों जीते है ?
ठीक वैसे जैसे कुछ रिश्ते बंद किताबों में होते है.
अपने आप से खुल कर बाते करो
दिलो – दिमाग पर छाये तूफान को बस गुजर जाने दो….

मृत, कटु अतीत , यादों का बोझ
स्मृतियों की निष्ठुरता
अक्सर बङी भारी होती है।
इनके वज़न तले दबे रहने से
अच्छा है, इस घुटन से निकल
इन्द्रधनुष के सात रंगों में जीवन जीना।
मुम्बई की रिमझिम वर्षा की फुहारें
गंदलाये समुन्द्र की उठती पटकाती लहरे,
आसमान से नीचे झुक आये धुंध बने बादल ,
सीकते भुट्टो की सोंधी खुशबू
देख फुहारों में भीगने का दिल हो आया. …..
बाद में कहीँ नज़र आया
टपकती झोपड़ियों में भीगते ठिठुरते बच्चे ,
यह मेह किसी के लिये मजा और किसी की सजा है.
बाहर का बरसात, अंदर आँखो के रस्ते बरसने लगा.
Image from internet.
जिंदगी ने बहुत से दर्द भरे सबक दिये,
उन्हें पन्नों पर उतारते-उतारते ,
फिर से……………
इश्क हो गया जिंदगी, कलम अौर कागज से
आप इन्हें जो चाहे कहें,
जिंदगी के रंग, जिंदगी के फलसफे, तजुर्बे या कविता……….
हसरतों -अरमानों को पूरी करने की उम्र में, जब जिंदगी सबक सिखाने लगे,
तब समझ लो जिंदगी रंग दिखाने लगी है, तुम्हें दरिया सा गहरा बनाने लगी है।
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