समंदर हँसा रेत पर – देखो हमारी गहराई अौ लहराती लहरें,
तुम ना एक बुँद जल थाम सकते हो, ना किसी काम के हो।
रेत बोला —
यह तो तुम्हारा खारापन बोल रहा है,
वरना तुम्हारे सामने – बाहर अौर अंदर भी हम हीं हम हैं
— बस रेत हीं रेत !!!
समंदर हँसा रेत पर – देखो हमारी गहराई अौ लहराती लहरें,
तुम ना एक बुँद जल थाम सकते हो, ना किसी काम के हो।
रेत बोला —
यह तो तुम्हारा खारापन बोल रहा है,
वरना तुम्हारे सामने – बाहर अौर अंदर भी हम हीं हम हैं
— बस रेत हीं रेत !!!
धोखा- फरेब की परिभाषा खोजने पर,
जवाब मिला, दूर जाने की क्या जरुरत है?
यह तो अक्सर पास वालों से मिलता है।
खरीदने की भी जरुरत नहीं, मुफ्त बँटता रहता है,
बस थोङा भरोसा कर के तो देखो….
Amarnath yatra – terror attack
हिमालय के हिम शिखरों पर जमे बर्फ जैसे
कलेजे को जमा देने वाली ये खबरें
दिल दहला देती है……
हिमालय शिव दर्शन इतना दर्दनाक क्यों निकला ???

आँखोँ से आँखों मे, अौर फिर , कही दिल में उतर कर
सारे राज ना कोई जान ले,
खजाने हैं…..
कुछ बेमोल- कुछ अनमोल !!!
जब भी किसी ने आँखों से मदद मागीं
अौर
नादानी में, अनदेखा किया, वे आज भी याद हैं।
लरजते आँखों को पहचान लेना, ऐसे हाथों को
कस कर थाम लेना,
शायद सबसे बङी इबादत है !!!!
दिल के सच्चे लोग कुछ एहसास लिखते है,
मामूली शब्दों में ही सही कुछ खास लिखते है।
Source: दिल के सच्चे लोग…..
कल पेड़ पर अटके – लटके ,
आँसू बहाते एक गिरगिट से हुई मुलाकत .
उसने कहा –
घड़ी के काटें के साथ पल पल बदलते ,
तुम लोगों को देखने के बाद अब ……
अपने रंग बदलने की अदा का मै क्या करूँ ?
मेरी तो पहचान ही खो गई है .
image from internet.

थोड़ी तल्खी भी तबीयत में बहुत लाजमी है,..
लोग पी जाते, जो समन्दर खारा न होता..
Anonymous.

मृत, कटु अतीत , यादों का बोझ
स्मृतियों की निष्ठुरता
अक्सर बङी भारी होती है।
इनके वज़न तले दबे रहने से
अच्छा है, इस घुटन से निकल
इन्द्रधनुष के सात रंगों में जीवन जीना।
You must be logged in to post a comment.