साथ

दूरियाँ कितनी भी हो, बातें हो ना हों ,

पर साथ ऐसा भी होता है कि

कुछ पूछना ना पङे……….

हाल पता हो…..

क्योंकि

साथ रहते रहते, साथ छूटते देखा है।

बंधन

 

कभी कहीं सुना था –
किसी को बंधनों में बाँधने से अच्छा है, आज़ाद छोङ देना।
अगर अपने हैं ,
अपने आप वापस लौट आएगें।

एक सच्ची बात अौर है –
अगर लौट कर ना आयें, तब भी गम ना करना।
क्योंकि
जगह तो बना कर जा रहें है,
शायद किसी ज्यादा अपने के लिये………..

मुकम्मल जहाँ

 

सपने, कविता ,ग़ज़ल, शायरी में तो जमीं आसमां अौ सारे जहाँ मिल जाते हैं..

पर उनसे बाहर निकलो , तब मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ।

दिल छू जायें

बिन मोल के ये अक्षर अौर शब्द तब अनमोल हो जाते हैं,
जब
उन के भूलभुलैया में उलझ कर,
उन से बनी हुई कविताअों,
के शब्दों का
जादू

दिल छू जायें !!!

रिश्तों में गहराई

इन रिश्तों का क्या करें , जिस में गहराई पता हीं ना चले  ?

यह  पता ही ना चले – यह प्यार है या जरुरत…

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 जिंदगी के रंग  19  – रौशन चाँद 


आसमान में झिलमिलाते  सितारे  , 

जगमगाता रौशन चाँद ….

खो गए  

अमावस के अँधेरे में.

और धीरे से  कहा –

जिंदगी के रंगो को  देखो  ….

टूटना और जुटना सीखो.

हम भी तो आधे -अधूरे -पूरे होते रहते है.

यह चक्र तो चलता ही  रहता है. 

वक़्त का खास होना…..

वक़्त का खास होना ज़रुरी नहीं,

खास लोगों के लिये वक़्त होना ज़रुरी हैं।

 

Source: वक़्त का खास होना…..

रेत के नीचे बहती एक  नदी – कविता 



आँखों की चमक ,

होठों की मुस्कुराहटों ,

तले दबे 

 आँसुओं के  सैलाब ,


और दिल के ग़म 

नज़र आने के लिये 

नज़र भी  पैनी  चाहिये.

 कि 

रेत के नीचे बहती एक  नदी भी  है.

बिखरे पन्ने

जीवन के बिखरे पन्नों को समेटते – समेटते,

लगा जैसे युग बीत गये………

पर यादों के समुन्द्र से बाहर आ कर देखा,

बस कुछ हीं पल गुजरें थे।

 

रंग-बिरंगी तितलियों से विचार

जेहन में उमङते-घुमङते विचार,

पन्नों पर शब्दों का जाल बना लिख ङालो,

तब

कविता बन जाती है………..

वरना,

ये उङ जाते हैं,

रंग-बिरंगी तितलियोँ की तरह।

शायद …. किसी अौर फूल पर !!!!