शब्दों के घाव destroy somebody by words

तलवार अौर आघातों के

गहरे घावों को भरते देखा है।

पर ना दिखने वाले शब्दों के घावों

को ताउम्र कसकते देखा है।

शब्दों से किसी को नष्ट करना आसान है

पर कटु शब्दों के तासीर को

नष्ट करना नामुमकिन है।

 

 अपने  को पाना, Your relationship with you

 

खुद को   ना खोने देना

अौरों को खुश करने की कोशिश में।

 अपने  को पाना

लोगों को खोने से अच्छा है।

जिंदगी के रंग – 41

उलझती जिन्दगी के तारों को सुलझाते हुए 

बड़े बेज़ार हो नराजगी से कहा –   

ऐ जिंदगी कभी तो मुस्कुराने दे 

 इन उलझनों से बाहर आने दे . 

जवाब मिला –  यही हैँ  जिंदगी……

यह  सब तो   सबक हैँ 

वर्ना तुझे  शिकायत होगी मुझ से 

कि कुछ सिखाया  नहीँ .

 यही हैँ  जिंदगी ! ! ! ! ! ! 

जिंदगी थी खुली किताब

जिंदगी थी खुली किताब,

हवा के झोकों से फङफङाती ।

आज खोजने पर भी खो गये

पन्ने वापस नहीं मिलते।

शायद इसलिये लोग कहते थे-

लिफाफे में बंद कर लो अपनी तमाम जिन्दगी,

खुली किताबों के अक्सर पन्नें उड़ जाया करते है ।

कहाँ से इंद्रधनुष निकला है ?

बरसात की हलकी फुहार

के बाद सात रंगों की

खूबसूरती बिखेरता इंद्रधनुष निकल आया।

बादलों के पीछे से सूरज की किरणें झाँकतीं

कुछ खोजे लगी….. बोली….

खोज रहीं हूँ – कहाँ से इंद्रधनुष निकला है ?

इंद्रधनुष की सतरंगी आभा खिलखिला कर हँसी अौर

कह उठी – तुम अौर हम एक हीं हैं,

बस जीवन रुपी वर्षा की बुँदों से गुजरने से

मेरे अंदर छुपे सातों रंग दमकने लगे हैं।

आसमान के बादल

आसमान के बादलों से पूछा –

कैसे तुम मृदू- मीठे हो..

जन्म ले नमकीन सागर से?

रूई के फाहे सा उङता बादल,

मेरे गालों को सहलाता उङ चला गगन की अोर

अौर हँस कर बोला – बङा सरल है यह तो।

बस समुद्र के खारे नमक को मैंने लिया हीं नहीं अपने साथ।

रंग बदलता सूरज

सुबह का ऊगता सूरज,

नीलम से नीले आकाश में,

लगता है जैसे गहरे लाल रंग का माणिक…..रुबी…. हो,

अंगूठी में जङे नगीने की तरह।  

दूसरे पहर में विषमकोण में  कटे हीरे

की तरह आँखों को चौंधियाने लगता है ।

सफेद मोती से दमकते चाँद के आगमन की आगाज़ से

शाम, पश्चिम में अस्त होता रवि रंग बदल फिर

पोखराज – मूंगे के पीले-नारंगी आभा से

रंग देता है सारा आकाश।

रंग बदलते सूरज

की रंगीन रश्मियाँ धरा को चूमती

पन्ने सी हरियाली से 

  समृद्ध करती हैं…

 

image courtesy  google.

उम्मीद जब शुन्य हो Starting from Zero

उम्मीद जब शुन्य  हो,

 कोई भी उसे समझ ना सके।

तब गहरे अंदर  छिपे

हुए अपनी हर शक्ति स्रोत को

जागने दो,

मुक्त छोड़ दो…

खुद को खुद के बंधन से।

अपने अंदर की शक्ति अौर सौंदर्य को पहचानो।

शुन्य से हीं शुरु करो,

राहें मिलती जायेगीं।

जिंदगी के रंग – 40

बातो में खुशबू 

कभी कभी ही महसूस होती है 

जैसे कच्चे  गुलाबे  इत्र  की महक हो फैली हर ओर .

यह हवा के झोंके से बिखरती नहीँ 

कहीँ गहरे दिल में

 खजाने बन जमा हो जाती  हैँ .

यादों के गुलाब बन कर  .

फिजा में बिखरी खुशबू


फिज़ा
में बिखरी खुशबू खिसकती सरकती 
ना जाने कब 

पास पहुँच कर 

गले में बाँहें डाल 

अतीत की ओर खीँच  ले गई .

किसी के यादों के साये और गुलाबों के बीच ले गई .