आवाज़ हीं पहचान है !!

कहते तो हैं– आवाज़ हीं पहचान है !!

पर क्या मिला  है कोई ?

 जो  आवाज  से आपकीखुशी या गम जान लें 

अगर  मिलें तो दिल केकरीबरखना इन्हें,

बङे खास  होते हैं  ये लोग।

हुनर

 

 

दरख्तों से ताल्लुक का हुनर सीख ले इंसान,

 

जड़ों में ज़ख्म लगते हैं, और सूख टहनियाँ जाती हैं.

 

Anonymous

हौसला

तेल खत्म होते दिये की धीमी लौ की पलकें झपकने लगी,

हवा के झोंके से लौ लहराया

अौर फिर

पूरी ताकत से जलने की कोशिश में……

 धधका …..तेज़ जला…. अौर आँखें बंद कर ली।

बस रह गई धुँए की उठती लकीरें अौर पीछे की दीवार पर कालिख के दाग।

तभी पूरब से सूरज की पहली किरण झाँकीं।

शायद दीप के हौसले को सलाम करती सी।

ख्वाबों जैसे  कई रंग – श्रद्धांजली Tribute to my Father

जब भी   अपने दिल को छूआ….महसूस किया ….टटोला

ख्वाबों जैसे,  कई रंग  छलक कर बिखर गये

दर्द, खमोशी , खुशियाँ भरे  !! 

नम आँखों से उसे सहला कर

धङकनों के साथ  वहीं वापस 

 रख दिया।

 श्रद्धांजली

 नमन पिता को !!!!!

21.12.2015

जिंदगी के रंग – 45

जिंदगी के रंग निराले

जो कभी खून करना चाहते थे, उन्हें खून देते देखा।

जो जान लेना चाहते थे, उन्हें जान देते देखा

जो लाखों लोगों का दिल धङकाते थे,

उन्हें एक-एक धङकन के लिये मोहताज़ होते देखा।

जिनके लिये लाखों दुआएँ मागीं , उन्हें बद्दुआ देते देखा।

दिल में जगह देनेवालों को दिल तोङते देखा।

इन सब के बाद भी जीने की जिद देखी।

    बङी अजीब पर नशीली अौ हसीन है यह दुनिया…………….

ज़िंदगी के रंग – 44

आज

क्या कुछ ख़ास बात है ?

नज़ारे ख़ूबसूरत लग रहे है,

लोग प्यारे लग रहे है,

मौसम ख़ुशगवार सा है

लगता है ……

शायद आज दिल ख़ुश है।

दर्द भरे दिल पर बोझ

दर्द भरे दिल पर पङे बोझ को जब उठाया

उसके तले दबे
बहुत से जाने पहचाने नाम नज़र आये।

जो शायद देखना चाहते थे….
तकलीफ देने से कितना दर्द होता है?

पर वे यह तो भूल गये कि
  चेहरे पर पङा नकाब भी तो सरक उनके असली चेहरे दिखा गया।

My 3rd Anniversary with WordPress.com!

Life  is a journey not a destination !!!!

 

जीवन  एक यात्रा है,

मंजिल नहीं।

 इस  यात्रा में खुशियाँ   ….बाधाएं…  आती जाती हैं।

यही  जिंदगी हैं।

    इस  लेखन यात्रा  में 

कभी मन की पीङा, कभी खुशियाँ

 आप सबों से बाँटतें बाँटतें  

 तीन साल गुजर गये …. पता हीं नहीं चला।

  आज यह ब्लॉग और मेरे ब्लॉगर मित्र

मेरे  लिये  खजाना  – अनमोल  निधि हैं।

गैरों पर भरोसा

अपनी तो आदत थी

गैरों पर भी यकीन करने की।

अपनों ने हीं सिखा दिया शक करना।

गैरों पर भरोसा किया होता,

तब शायद धोखे कम मिले होते..

चोट के निशान

मन अौर दिल पर लगे,

हर चोट के निशान ने मुस्कुरा कर

ऊपरवाले को शुक्रिया कहा…..

जीवन के हर सबक, पीड़ा  अौर आघात के लिये

ये तमगे हैं, जिन्हों ने जीना सीखाया।