अँधेरा

समय  चक्र चलता रहता है,

अँधेरा …. अौर फिर उजाला….

कहते हैं –

अँधेरे को उजाला हराता है।

पर अक्सर लगता है –

रात के अँधेरे अनोखे….  अद्भुत…… विचार देते हैं।

शायद

मौन अंधेरा आँखों

की ताकत भी दिलो दिमाग में भर देता है।

शायद

स्वयं को देखने अौर आत्म मंथन

के हालात बना नवल -नये विचारों को जगाता है।

परिंदे

इन परिंदों की उङान देख,

चहचहाना सुन ,

रश्क होता है।

कितने आज़ाद हैं……

ना बंधन, ना फिक्र  कि …….

कौन सुनेगा ….क्या कहेगा…….

बस है खुली दुनिया अौर आजाद जिंदगी।

यह बयार

यह बयार गजब ढातीं हैं

कभी बुझती राख की चिंगारी को हवा दे

आग बना देतीं है।

दिल आ जाये तो , खेल-खेल में

जलते रौशन दीप अौ शमा  बुझ देती है

जिंदगी के रंग -47

चाहो जरुर अपने आप को ।

पर इतना भी ना चाहो कि

किसी अौर को चाहने की

जगह हीं ना रहे दिल में।

अौर

चाहो जरुर दूसरों को ।

पर इतना भी ना चाहो कि

खुद को चाहने की जगह ही ना रहे दिल में।

 

कविता की अंतिम तीन   पंक्तियाँ   सआभार ब्लॉगर मित्र  अभय  के सौजन्य से ।

जिंदगी के रंग – 46 Non-perfect Life

गैर मुकम्मल सी  इस जिंदगी में समय अौर हालात तय करते हैं

सब अपने हैं !!

या

कोई अपना नहीं है !!

  word meaning –
गैर मुकम्मल – Non-perfect

जीवन के  उजाले

जीवन के  उजाले में

साथ निभाने वाले कई  मिलते हैं

मज़ा तो तब है

जब  अंधेरे में भी साथ बैठने वाला…..

साथ देने वाला कोई हो।

असल रौशनी तो तब दिखती है।

आवाज़ हीं पहचान है !!

कहते तो हैं– आवाज़ हीं पहचान है !!

पर क्या मिला  है कोई ?

 जो  आवाज  से आपकीखुशी या गम जान लें 

अगर  मिलें तो दिल केकरीबरखना इन्हें,

बङे खास  होते हैं  ये लोग।

हुनर

 

 

दरख्तों से ताल्लुक का हुनर सीख ले इंसान,

 

जड़ों में ज़ख्म लगते हैं, और सूख टहनियाँ जाती हैं.

 

Anonymous

हौसला

तेल खत्म होते दिये की धीमी लौ की पलकें झपकने लगी,

हवा के झोंके से लौ लहराया

अौर फिर

पूरी ताकत से जलने की कोशिश में……

 धधका …..तेज़ जला…. अौर आँखें बंद कर ली।

बस रह गई धुँए की उठती लकीरें अौर पीछे की दीवार पर कालिख के दाग।

तभी पूरब से सूरज की पहली किरण झाँकीं।

शायद दीप के हौसले को सलाम करती सी।

ख्वाबों जैसे  कई रंग – श्रद्धांजली Tribute to my Father

जब भी   अपने दिल को छूआ….महसूस किया ….टटोला

ख्वाबों जैसे,  कई रंग  छलक कर बिखर गये

दर्द, खमोशी , खुशियाँ भरे  !! 

नम आँखों से उसे सहला कर

धङकनों के साथ  वहीं वापस 

 रख दिया।

 श्रद्धांजली

 नमन पिता को !!!!!

21.12.2015