दरिया पर बरसते बादल !!

दोनों ने एक दूसरे को देखा ग़ौर से,

फिर दरिया पर बरसते बादल से पूछा

दरिया ने –

मुझे मेरा दिया हीं लौटा रहे हो?

या अपने राज मेरे कानों में गुनगुना रहे हो …

क्या अपने दिल की बातें मुझे सुना रहे हो?

 

शाम की दहलीज़ पे !!

हमेशा की तरह,

आज भी शाम की दहलीज़ पे,

आफ़ताब आसमान में सिंदूर फैलाए

इंतज़ार करता रहा चाँद का और तारों की बारात का.

क्या वह जानता नहीं

उसके तक़दीर में इंतज़ार और ढलना लिखा है?

 

आफ़ताब

इसे इबादत कहें या डूबना?

ज़र्रे – ज़र्रे को रौशन कर 

क्लांत आतिश-ए-आफ़ताब,

अपनी सुनहरी, पिघलती, बहती,

रौशन आग के साथ डूब कर 

सितारों और चिराग़ों को रौशन होने का मौका दे जाता  है.

 

 

अर्थ:

आफ़ताब-सूरज

आतिश – आग

इबादत-पूजा

क्लांत –थका हुआ

माँ या मानवता !!

उस दिन मौत किसकी हुई ?

माँ की ?

या मानवता की ?

या दोनों की ??

क्यों कोई नहीं  आया उसे गोद में उठाने ?

 

जिंदगी के रंग -207

प्रश्न  बङा कठिन है।

 दार्शनिक भी है, तात्त्विक भी है।

पुराना  है,  शाश्वत-सनातन भी  है।

तन अौर आत्मा या कहो रुह और जिस्म !!

इनका  रिश्ता है  उम्रभर का।

खोज रहें हैं  पायें कैसे?

 दोनों को एक दूसरे से मिलायें कैसे?

कहतें हैं दोनों  साथ  हैं।

फिर भी खोज रहें हैं – मैं शरीर हूँ या आत्मा? 

चिंतन-मनन से गांठें खोलने की कोशिश में,

 अौर उलझने बढ़ जातीं हैं।

मिले उत्तर अौर राहें, तब बताना।

 पूरे जीवन साथ-साथ हैं,

पर क्यों मुश्किल है ढूंढ़ पाना ?

 

 

खबरें

सब कहते हैं –  प्रकृति  निष्ठुर हो गई है।

पर क़ुदरत से बेरुखी किया हम सब नें ।

कभी सोंचा नहीं यह  क्या कहती है?

 क्यों कहती हैं?

कटते पेङ, मरती नदियाँ आवाज़ें देतीं रहीं। 

जहर बना जल, सागर, गगन। 

हवाएँ कहती रहीं –

 अनुकूल बनो या नष्ट हो जाअो…….

अब, पता नही खफ़ा है ? 

 दिल्लगी कर रही है?

या अपने  नियम, कानून, सिद्धांतों पर चल रही है यह ?

खबरें पढ़ कर विचार आता है –

आज हम पढ़तें हैं हङप्पा अौर मोहनजोदाङो,

हजारों साल बाद क्या कोई हमें पढ़ेगा?

 

कोविड-19

बात  बड़ी महत्वपूर्ण है। दुनिया है तो बीमारियां होंगी ही और वायरस भी होंगे । पहले भी चीन से  कुछ इंफेक्शन फैले हैं – 2002 में सार्स,  h7 n9 आदि।  पर   कोरोना या कोविड-19 सबसे भयंकर है।  यदि चमगादड़ों की समस्या इतनी गंभीर थी कि 2005 से उस पर शोध  चल रहे थे। इसके लिए बैटवुमैन जैसे शब्द चर्चे में थे। तब क्या समय रहते चेतावनी और रोकथाम या अन्य देशों से मदद लेने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए था? शायद लाखों लोगों की जानें बच जातीं।

China’s bat woman  warns coronavirus is just the tip of the iceberg

Shi Zhengli, a virologist renowned for her work on coronavirus in bats, emphasized on the need for studying viruses among wild animals in advance to prevent another pandemic. BLOOMBERG NEWS25 May, 2020 9:44 pm IST

जिंदगी के रंग -206

कलम थामे

     लिखती उंगलियाँ आगे बढ़ती जातीं हैं।

           तब  एक जीवंत रचना उभरती हैं।

                ये उंगलियाँ संदेश हैं –

                        जिंदगी आगे बढ़ते जाने का नाम है।

                                 आधे पर रुक कर,

पंक्तियोँ…लाइनों को अधूरा छोङ कर,

       लिखे अक्षरों को आँसूअों से धुँधला कर,

                 सृजनशीलता…रचनात्मकता का अस्तित्व संभव नहीं।

                         यही पंक्तियाँ… कहानियाँ… कविताएँ,

                                   पन्नों पर उतर,

                                             आगे बढ़नें  की राहें  बन जातीं हैं। 

 

दर-ओ-दीवार

दूरियाँ- नज़दीकियाँ तो दिलों के बीच की बातें हैं।

 दीवारों पर इल्ज़ाम क्यों? 

जो खुद चल नहीं सकतीं वे दूसरों की दूरियाँ क्या बढ़ाएँगीं?

अक्सर  दीवारें रोक लेतीं हैं ग़म अौर राज़ सारे अपने तक,

अौर समेटे रहतीं हैं इन्हें  दिलों में अपने।

किलों, महलों, हवेलियों, मकानों, घरों से पूछो……

इनके दिलों में छुपे  हैं कितने राज़, कितनी कहानियाँ।

अगर बोल सकतीं दर-ओ-दीवारें…….

बतातीं दीवार-ए-ज़ुबान से,  सीलन नहीं आँसू हैं ये उसके।

वह तो गनिमत है कि….. 

दीवारों के सिर्फ कान होते हैं ज़ुबान नहीं।

जिंदगी के रंग -205

जीवन में खुश रहने और  सार्थकता ढूंढने में क्या अंतर हैं? 

क्या दोनों साथ-साथ चल सकतें हैं? 

अर्थपूर्णता…सार्थकता के खोज  में अतीत, वर्तमान और भविष्य शामिल होतें हैं।

इसके लिये सही-गलत सीखना पङता है

 खुशियों  के लिये कोई समय, सही-गलत,  कोई शर्त नही होती।

खुशियाँ अपने अंदर होतौं हैं, किसी से मांगनी नहीं पङती है।

सार्थकता जुड़ा है – कर्तव्य,  नैतिकता से।

सार्थकता और अर्थ  खोजने में कभी-कभी  खुशियाँ  पीछे छूट जाती है।

पर जीवन से संतुष्टि के लिये दोनों जरुरी हैं।