Category: The Bard’s Apprentice!
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
सुकून
सागर के दिल पर तिरती- तैरती नावें,
याद दिलातीं हैं – बचपन की,
बारिश अौर अपने हीं लिखे पन्नों से काग़ज़ के बने नाव।
नहीं भूले कागज़ के नाव बनाना,
पर अब ङूबे हैं जिंदगी-ए-दरिया के तूफान-ए-भँवर में।
तब भय न था कि गल जायेगी काग़ज की कश्ती।
अब समझदार माँझी
कश्ती को दरिया के तूफ़ाँ,लहरों से बचा
तलाशता है सुकून-ए-साहिल।
जिंदगी के रंग – 208
दुनिया में होङ लगी है आगे जाने की…
किसी भी तरह सबसे आगे जाने की।
कोई ना कोई तो आगे होगा हीं।
हम आज जहाँ हैं,
वहाँ पहले कोई अौर होगा….. उससे भी पहले कोई अौर।
ज़िंदगी सीधी नहीं एक सर्कल में चलती है।
जैसे यह दुनिया गोल है।
ज़िंदगी का यह अरमान, ख़्वाब –
सबसे आगे रहने का, सबसे आगे बढ़ने का……
क्या इस होड़ से अच्छा नहीं है –
सबसे अच्छा करने का।
Image courtesy- google.
नकाब
People don’t change, Sometimes their mask falls off.
जानते थे उन्हें ज़माने से।
अचानक बदले रूख को देख कर लगा।
क्या लोग बदल जाते हैं?
ज़माने बदलने के साथ?
फिर समझ आया,
यह तो नकाब था,
जो खिसक गया था चेहरे से ।
ख्वाब
आघात – प्रतिघात
The true mark of maturity is when somebody hurts you and you try to understand their situation instead of trying to hurt them back.
कई तरह के लोगों को देखा है।
कुछ तो खोए रहते हैं अपने आप में, कुछ अपने दर्द में।
पर बीमार अौर खतरनाक वे हैं जिन्हें मजा आता है,
दूसरों को बिन कारण दर्द और तकलीफ पहुंचाने में।
सबसे सही संतुलित कौन है?
ऐसे भी लोगों को देखा है,
जो चोट खा कर भी चोट नहीं करते।
आघात के बदले प्रतिघात नहीं करते।
क्योंकि
वे पहले दूसरे की मनःस्थिति को समझने की कोशिश करते हैं।




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