
नया सहर


ज़िंदगी की कुछ अहम बातें है –
दिल औ दिमाग़ में ज्ञान भरने के लिए पढ़ना,
दिल औ दिमाग़ में भरे दर्द हटाने,
खाली करने के लिए लिखना।
बातों को समझने के लिए ज़िक्र औ चर्चा करना।
यादों से निकलने के लिए उनको समझना।
बातों को आत्मसात् करने के लिए पढ़ाना।
राज़-ए-दिल और दिल की बातें दिल में रखना।

चोट किसी की ख़्वाहिशों के
अन्दाज़ से नहीं भरता।
भरता है, अपने तरीक़े से,
अपने समय से।
कुरेदने से राख़ में दबी चिंगारी
आग भड़काती है फ़िज़ाओं में ।
अपने चोट, घाव ना कुरेद,
दो समय भरने का।
Wounds don’t heal the way we
want them to, they heal the way
they need to. It takes time to heal.
Be gentle with your wounds.

हम थे ख़फ़ा ख़फ़ा उन से।
और बेरुख़ी से वो चल दिए,
वहाँ जहाँ हम मना ना सके।
वफ़ा-जफ़ा, वफ़ाई-बेवफ़ाई,
के ग़ज़ब हैं अफ़साने।
ग़ज़ब हैं फ़साने।
हमें ऐतबार हीं नहीं रहा ज़माने पर।

गहरे सागर मंथन से अमृत मिला और गरल।
अपने अंदर के रौशनी-अंधकार समझ ऊपर उठना है,
अपनी भावनाओं-विकारों को देखना-समझना है,
तब दिल-औ-दिमाग़ का सागर मंथन है सबसे सरल।

अपेक्षायें, सफ़ाई और
कई जज़्बा-ए-बेनाम,
आने लगे सफ़र-ए-ज़िंदगी के बीच।
जो चैन और सुकून छीन ले,
तब
लोगों को ना करे कोशिश बदलें की।
आसपास के लोगों को बदल दें।
अर्थ- जज़्बा-ए-बेनाम: अनाम अहसास / nameless emotions.

चाहत मेरी या चाहत तेरी,
है क्या रूबरू हक़ीक़त से?
कहते हैं मिल जाती है कायनात,
चाहो ग़र शिद्दत से।
पर कुछ हसरतें, रह जातीं हैं हसरतें।
ग़र तुम चाहते हो किसी को रूह से
तब बनी रहेगी यह
मद्धम सी लौ-ए-चाहत अनंत तक।
आसमाँ और ज़मीं, सूरज और चाँद की उल्फ़त सी।
कुछ चाहतों में मिलन नहीं,
होती हैं ये चाहतें, चाहते रहने के लिये।

#TopicByYourQuote
Thank you YourQuote for the wonderful surprise reward. I am really thrilled to receive
* a beautiful handmade paper notebook
* a lovely diary and
* Your Quote’s Precious spotted writer badge

अक्सर लगता है,
ग़ज़ब तनाव है ज़िंदगी में।
अजब ताव है फ़िज़ा में।
साया-ए-ग़म में साँसें है घुटी-घुटी।
हँसी की रौशनी जैसे लुटी-लुटी।
उदासी के अँधेरे में भाव बढ़ा जैसे चराग़ का।
सच यह है कि इसी उलझन का नाम है ज़िंदगी।
इसे मुस्कुरा कर जीना है बंदगी।
सामना करो, नाम दो पहचान दो एहसासों को।
भावनायें और दिलो-दिमाग़ ग़र सीख गए संभलना।
चाँद उतर आएगा फिर ख़ुशियों के समुंदर में।
International Stress Awareness Day-
Don’t become the slave of your emotions.
recognise your emotion and your triggers
and handle Them with care. Otherwise they’ll
Make you fragile.

विचलित नहीं होना मन मेरे, देख कफ़न का सफ़ेद नूर।
यह तो है राह-ए-सुकून, दुनिया के दुःख-दर्द से दूर।
होते हैं कई बदकिस्मत बे-कफ़न
होते है कुछ जीते-जी मद में चूर।
भूल जाते है ज़िंदगी है रूहानियत,
समझदारी है, नही रखने में ग़ुरूर।
कफ़न में जेब नहीं होती, यह है मशहूर।
कर्मों की वसीयत होती है रूह पर ज़रूर।

#TopicByYourQuote
You must be logged in to post a comment.