Author: Rekha Sahay
His love!
If I were offered a kingdom,
And the world’s riches
Were placed at my feet.
I would bow with my face low and say,
“This does not compare to His love!
❤ Rumi
Fall in love with yourself!!!

“Loving yourself isn’t Vanity, it’s Sanity”…
We all feel fancy when we say LOVE… It can be love for anyone in anyway but have we ever asked ourselves is it really love? 80% of us still don’t know what really love is. Most of us say we love something or someone but sooner or later it ends. Why? Do you really think love ends? Or love really exists this way? If something really ends, it is not love but affection or attraction.
There is no exact definition of love, it can only be felt and there is very easy way to understand that feeling. Need to do is love yourself first. Fall in love with ‘YOU’, love every bit of you. Be grateful of what you are. Look finest in your own ways, pamper yourself, dress up the way you want to, devote maximum free time to yourself, dance to…
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The world breaks everyone……
The world breaks everyone,
and afterward,
some are strong at the broken places.
~~ Ernest Hemingway
The good life
The good life is best construed
as a matrix that includes happiness,
occasional sadness, a sense of purpose,
playfulness, and psychological flexibility,
as well autonomy, mastery, and belonging.
~~Robert Biswas-Diener
जंगल ओलंपिक ( प्रेरक बाल कथा -बाल दिवस पर) Happy Children’s Day!
Children’s Day – 14.11.2017
Pandit Jawaharlal Nehru once said, “The children of today will make the India of tomorrow.”
गिल्लू गिलहरी बहुत दौड़ती थी। वह जंगल ओलंपिक में भाग लेने की तैयारी कर रही थी।हर दिन सुबह उठ कर वह दूर तक दौड़ लगाती थी।उसने अपने भोजन में दूध और मेवे शामिल कर लिए थे।वह स्कूल में भी खेल-कूद में भाग लेने लगी थी।वह चाहती थी कि उसकी चुस्ती-फुर्ती बढ़ जाये। अब वह पहले की तरह हर समय टीवी और कंप्यूटर में व्यस्त नहीं रहती थी।कोच बंकु उसकी मेहनत से बहुत खुश थे।
पर जब भी कोच बंकु बंदर अभ्यास करवाते तब वह पीलू खरगोश से पीछ छूट जाती थी। पीलू ख़रगोश बड़ा घमंडी था। अभ्यास के समय पीलू आगे निकल कर सभी को जीभ चिढ़ाता। अगर कोई उससे आगे निकलने की कोशिश करता, तब वह कोच की नज़र बचा कर उसे धक्का दे कर गिरा देता। गिल्लू को लगने लगा था, वह रेस जीत नहीं पाएगी।
इस साल हिमालय नेशनल पार्क के राजा तेज़ा शेर ने अपनी सभा में जंगल ओलंपिक खेलों की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि खेलों से सदभावना और दोस्ती बढ़ती है। खेल हमें स्वस्थ रखते हैं। इससे हमारे जीवन में अनुशासन आता है। इसलिए जंगल में ओलंपिक खेलों का आयोजन किया जा रहा है।इसमें अन्य जंगलों को भी न्योता दिया गया है। इस ओलंपिक में अनेक प्रकार के खेलों को शामिल किया गया था। गिल्लू ने छोटे जानवरों के 1000 मीटर लंबी दौड़ मे हिस्सा लिया था।
राजा तेज़ा ने जंगलवासियों को मनुष्यों के ओलंपिक खेलो की जानकारी दी। इस खेल का आयोजन हर चौथे वर्ष किया जाता है। वे चाहते है कि हिमालय नेशनल पार्क के जंगल में ओलंपिक का आयोजन हो। सभी जानवर इस ऐलान से बहुत खुश थे। इस आयोजन के लिए खेल के मैदान तैयार किए जाने लगे। दौड़ के लिए रेस-ट्रैक बनाए जा रहे थे।
गिल्लू जी-जान से मेहनत कर रही थी। आज के दौड़ के अभ्यास में वह सबसे आगे थी। जैसे ही उसने पीछे पलट कर पास आते पीलू को देखा,वह घबरा गई। पीलू उसे जीभ दिखाते हुए तेज़ी से आगे निकल गया। गिल्लू की आँखों में आँसू आ गए। दौड़ के बाद वह आम के पेड़ के पीछे जा कर आँसू पोछने लगी। तभी कोच बंकु वहाँ आए। उन्हों गिल्लू को बिना डरे अभ्यास करने कहा। पर गिल्लू बहुत घबरा गई थी।
अभ्यास के बाद गिल्लू अपने घर पहुची। बड़े पीपल के पेड़ के सबसे ऊपर के ड़ाल के बिल में उसका घर था। पर वह घर के अंदर नहीं गई। बाहर ऊंची ड़ाल पर बैठ गई। वहाँ से सारा जंगल नज़र आता था। उसे अपने दौड़ का ट्रैक नज़र आ रहा था। कल ही प्रतियोगिता है। वह रोने लगी। उसे लग रहा था कि वह कभी पीलू से जीत नहीं पाएगी। तभी पीछे से उसकी माँ ने आवाज़ दिया- बेटा, तू तो सबसे तेज़ दौड़ती है। दौड़ तुम ही जीतोगी। गिल्लू ने हैरानी से पूछा- माँ, तुमने मुझे दौड़ते हुए कब देखा? माँ ने मुस्कुरा कर कहा- हर दिन मैं यहाँ से तुम्हें अभ्यास करते हुए देखती हूँ। गिल्लू ने सुबकते हुए पूछा- पर मैं पीलू से हार क्यों जाती हूँ? माँ ने उसके माथे पर हाथ फेरते हुए कहा- तुम अपने मन से हार का ड़र निकाल दो, और दौड़ते समय कभी पीछे मत देखो। मेरी सीख याद करते हुए दौड़ना। जीत तुम्हारी होगी।
अगले दिन गिल्लू समय पर तैयार हो कर दौड़ के ट्रैक पर पहुची। माँ ने दूर से हाथ हिलाया। दौड़ शुरू हुई। बिना पीछे देखे वह दौड़ती चली गई और वह रेस जीत गई। रेस में प्रथम आने के बाद उसने माँ से पूछा – माँ तुमने क्या जादू किया था?
माँ ने कहा- मैं ने कुछ भी नहीं किया था। बस तुम्हारे मन का डर निकल गया था। और हाँ, आगे वही बढ़ता है जो पीछे नहीं देखता । तुम दौड़ के समय बार-बार पीछे देखने मे जो समय लगाती थी। उसमें ही पीलू तुमसे आगे निकल जाता था। गिल्लू बेटा,खेल-कूद प्यार और सद्भावना बढ़ाता है,लड़ाई-झगड़ा नहीं। आज पीलू की दुष्टता रेस-ट्रैक के कैमरे में सभी को नज़र आ गई। आज दौड़ में उसने बिनी बिल्ली को धक्का दिया था। राजा तेजा ने उसे कड़ी सजा देने का ऐलान किया है और तुम्हें प्रथम पुरस्कार मिलेगा।
Three jewels on earth तीन रत्न
संस्कृित श्लोक / Sanskrit –
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम् |
मूढै: पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा प्रदीयते ||
English meaning –
There are three jewels on earth: water, food, and adages. Fools, however, regard pieces of rocks as jewels.
Hindi meaning –
पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं जल अन्न और अच्छे वचन । फिर भी मूर्ख पत्थर के टुकड़ों को रत्न कहते हैं फिरता है।
His voice in silence
Stop the noise.
You will hear His voice
in silence.
Rumi ❤
उम्मीद जब शुन्य हो Starting from Zero
उम्मीद जब शुन्य हो,
कोई भी उसे समझ ना सके।
तब गहरे अंदर छिपे
हुए अपनी हर शक्ति स्रोत को
जागने दो,
मुक्त छोड़ दो…
खुद को खुद के बंधन से।
अपने अंदर की शक्ति अौर सौंदर्य को पहचानो।
शुन्य से हीं शुरु करो,
राहें मिलती जायेगीं।
Real Heaven
Hell and heaven are not to be found in future,
for they are now, present.
When we love each other selflessly,
it is real heaven,
and when we are at war with each other and
spread hatred that is the real hell.
~~Shams Tabrizi
Shams-i-Tabrīzī was spiritual instructor or guru of Rumi.
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