
बातें


किवदन्तियाँ / पौराणिक कहानी- फल्गु नदी गया, बिहार में है। यह ऊपर से सूखी दिखती है। इसके रेत को हटाने से जल मिलता है। कहते है कि राम और सीता यहाँ राजा दशरथ का पिंडदान करने गए। राम समय पर नही आ सके। अतः ब्राह्मण के कहने पर सीता जी ने पिंडदान सम्पन्न कर दिया। राम के आने पर, उनके क्रोध से बचने के लिए फल्गु नदी ने झूठ कहा कि माता सीता ने पिंडदान नहीं किया है। माता सीता ने आक्रोशित होकर फल्गु नदी को अततः सलिला ( रेत के नीचे बहाने का) होने का श्राप दे दिया.
क़बूल भी नहीं कर सकते और इनकार भी नहीं कर सकते……
सचमुच देखा था तुम्हें क़रीब अपने.
हाथ भी बढ़ाया छूने के लिए.
तभी नींद खुल गईं और देखा बाहें शून्य में फैलीं हैं.
शायद सपने में घड़ी की सुईयों को पीछे घुमाते चले गए थे.
शायद बेख़ुदी में तुमको पुकारे चले गए थे.
Image- Aneesh
जब भी कहीं डेरा डालना चाहा.
रुकना चाहा.
ज़िंदगी आ कर कानों में धीरे से कह गई-
यह भी बस एक पड़ाव है…
ठहराव है जीवन यात्रा का.
अभी आगे बढ़ना है,
चलते जाना है. बस चलते जाना है.
image courtesy – Aneesh
हमेशा क़रीब होना हीं सही नही।
बहुत क़रीब से देखने पर पूरे दृश्य को नहीं देखा जा सकता है।
वे धुँधली हो जातीं हैं।
परिदृश्य या घटना का हिस्सा बन कर पूरी बातें नहीं समझी जा सकती हैं.
जैसे चित्र में रह कर चित्र देखा नहीं जा सकता.
थोङे फासले भी मायने रखते हैं।
तारीख़ों में छुपी हैं कितनी कहानियाँ.
किसी तारीख़ से जुड़ी होतीं हैं यादें,
किसी से दर्द, किसी से ख़ुशियाँ.
किसी से उम्मीद, आशाएँ और अरमान.
और कुछ तारीख़ें कब आ कर चली जातीं हैं,
पता हीं नहीं चलता.
सँवरी, ग़ज़ल सी ज़िंदगी जीने की हसरतें
किसकी नहीं होती? अौर, जो मिला है वही ग़ज़ल है।
यह समझते समझते ज़िंदगी निकल जाती है.

टिमटिमाते तारे, जगमगाते जुगनू, दमकता चाँद , नन्हें दीपक की हवा से काँपती लौ, सभी अपनी पूरी ताक़त से रात के अंधेरे का सामना करते हैं. फिर हम क्यों नहीं कर सकते सामान ? सहर तो होगी हीं….सूरज तो निकलेगा हीं….

एक अोर बहती कलकल गंगा,
तट पर विशाल अश्वत्थ तरु
अौर दूसरी अोर श्मशान काली की
भव्य प्रतिमा, रक्त रंग
जवा पुष्प माला में ।
घाटों पर बाँसों का स्तुप।
राह किनारे बिकते रामनामी…….
गुजरते उस राह से मन वैराग से
…..श्मशान-वैराग्य से भर उठता।
पर कितना विचित्र है यह मन?
संसार की नश्वरता का एहसास
वह क्षणिक वैराग्य
जो श्मशान में संसार की असारता से उत्पन्न होता है,
संसार के मोह-माया में आते, क्षण में हीं
लुप्त भी हो जाता है।
वैराग्य – संसार की असारता।
श्मशान वैराग्य-श्मशान में जाकर हुआ क्षणिक वैराग्य।
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