ख़ता

नज़रें झुका कर,

उठा कर,

पलकें झपका

कर अश्कों को क़ाबू

करना सीखा था, पर

आँखें ऐन वक्त पर

धोखा दे गईं।

जब आँखों को आँखें दिखाईं,

जवाब मिला

हमारी नहीं जज़्बातों

की ख़ता है।

नसीहत

ज़िंदगी ने कहा,

ध्यान से पढ़ो मेरा सबक़ ।

ये नसीहत

हमेशा काम आएँगे।

वरना इम्तहान

बार-बार होता रहेगा।

कंकर से शंकर

कल तक कंकर था।

तराश कर हीरा बन गया।

कल तक कंकर था।

बहती नर्मदा में ,

तराश कर शंकर बन गया।

तराशे जाने में दर्द है,

चोट है।

पर यह अनमोल बना देता है।

शुभ नव वर्ष! Happy new year!

कई सदियाँ, कई मौसम

आए और गये।

इबादतों में तलाश,

इबारतों में तलाश होती रही।

ख़ुशियों की… मन की शांति

और अमन की।

सब मिलता है,

ग़र ऊपर वाले की

क़ुदरत पर हो भरोसा।

ग़र गिले-शिकवे छोड़,

तलाश खुद की हो।

ग़र तराश खुद को लें।

नव वर्ष मंगलमय हो!

Happy New Year!!