एक दिन देखा शिव का चिता, भस्मपूजन उज्जैन महाकाल में बंद आंखों से ।
समझ नहीं आया इतना डर क्यों वहां से जहां से यह भभूत आता हैं।
कहते हैं, श्मशान से चिता भस्म लाने की परम्परा थी।
पूरी सृष्टि इसी राख में परिवर्तित होनी है एक दिन।
एक दिन यह संपूर्ण सृष्टि शिवजी में विलीन होनी है।
वहीं अंत है, जहां शिव बसते हैं।
शायद यही याद दिलाने के लिए शिव सदैव सृष्टि सार,
इसी भस्म को धारण किए रहते हैं।
फिर इस ख़ाक … राख के उद्गम, श्मशान से इतना भय क्यों?
कोलाहल भरी जिंदगी से ज्यादा चैन और शांति तो वहां है।

भस्मपूजन उज्जैन महाकाल में बंद आंखों से – वहाँ उपस्थित होने पर भी यह पूजन देखा महिलाओं के लिए वर्जित है.

Excellent
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thank you Diveyen
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😊
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सत्य रेखांकित करता प्रश्न!
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आभार नीरज .
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साँसें है तब तक वह शिव है
साँसें रुकते ही वह शव है
चिता कि राख लपेटे उसे पवित्र कर दिया यही तो महाकाल कि महीमा है।
बिन शिव क्या जीवन संभव है…..!!!!
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बिलकुल ! बहुत धन्यवाद शैंकी .
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