ख़्वाहिशों की चुभन

दिल क्यों वह चाहता है,

जो हो नहीं सकता.

फूटते बुलबुले को

फिर बनते देखा है क्या?

मालूम नहीं वह क्या है जिससे

ख़्वाहिशों की चुभन काम हो.

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