क्यों कुरेदते हो राख ?

बनाया भी रावण,
जलाया भी रावण.
फिर क्यों कुरेदते हो
राख को अगले बरस?
फिर रावण बनाने को?
और शिकायत भी करते हो,
कि मरता नहीं रावण.

आसमान का महताब

टिमटिमाते जुगनु और सितारे,

बोल पड़े –

यादों से धुँधली पड़ी ज़िंदगी

से बाहर निकल .

त्योहार है …ख़ुशियों का .

उमंग भरे रंग बिखेरो .

देखो, सीखो –

आसमान का महताब कितनी बार

अधूरा हो पूरा होता है .

फिर भी दमकता रहता है.