पतझड़ तो आएगा हीं…..

ज़िंदगी से चुराए

कुछ लम्हों से बदला

नहीं जा सकता मौसम .

पतझड़ तो आएगा हीं

जीवन हो या मौसम .

हाँ, मौसम-ए-बहार के

के आने के भ्रम में….

इंतज़ार में…..

कट जाते हैं पल ,

ग़म-ए-ज़िंदगी

का राज सुनाते,

शोर मचाते सूखे पत्तों के साथ .

11 thoughts on “पतझड़ तो आएगा हीं…..

  1. बहुत सुन्दर रचना 😚☺☺👏👏👏
    मेरी एक कविता “तारीख ” की कुछ लाइनें

    कुछ तारीखों में हरियाली
    तो कुछ पतझड़ के नाम रहेंगे

    कुछ तारीखों में दिनकर से बैर
    कुछ में वही दिनकर मन भायेगा

    समय समय की बात है प्रियवर
    हर तारीख नये रंग दिखलायेगा

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