आधी अधूरी ख़्वाहिशों का नशा

अरमानों और आधी अधूरी

ख़्वाहिशें के पीछे पीछे

भागने के नशे में

ज़िंदगी कब यहाँ पहुँच गई.

पता ही नहीं चला और

ख़्वाहिशें है कि आज भी

आधी अधूरी ही है

शायद अधूरी ख़्वाहिश के नशा

का अपना मज़ा है,

वे जीने का चाहत देती हैं.

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