ज़िंदगी के रंग -190

कुछ ना कुछ सबक़ ले कर आती है….

ख़्वाबों, ख़्वाहिशों को तोड़ती,

ज़िंदगी की ठोकरें.

तराशती है अनगढ़े टुकड़े को….

10 thoughts on “ज़िंदगी के रंग -190

  1. सच कहा। ख्वाहिशें टूटती हैं फिर सँवरती है।
    जिंदगी कभी रुलाती है फिर हंसाती है।
    हिम्मत ना हारना,
    ठोकरें जब लगे तो समझना
    कुछ सही होनेवाला है।

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