Your own heart

Why are you

knocking at

every other door?

Go,

knock at the door of

your own heart.

 

 

❤ ❤ Rumi

24 thoughts on “Your own heart

  1. बिलकुल ठीक बात है यह । संत कबीर तो सदियों पहले ही कह गए हैं – ‘कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर’ । और मुकेश जी का अमर गीत भी तो है – ‘दिल जो कहेगा, मानेंगे; दुनिया में हमारा दिल ही तो है; हर हाल में जिसने साथ दिया, वो एक बेचारा दिल ही तो है’ । जो मन के द्वार की कुंडी खड़का कर उसे खुलवा सके, उसे कहीं जाने की आवश्यकता नहीं । कस्तूरी तो मृग के भीतर ही होती है, बस उसे इसका भान नहीं होता, इसीलिए वह उसकी सुगंध के स्रोत को संसार में ढूंढता है । रफ़ी साहब का भी तो मशहूर नग़मा है – ‘ दिल की आवाज़ भी सुन, मेरे फ़साने पे न जा; मेरी नज़रों की तरफ़ देख, ज़माने पे न जा’ ।

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    1. आप के पास गीतों का खजाना है जितेन्द्र जी, जो आप बिलकुल सही समय पर व्यक्त करते हैं। बहुत आभार आपका। 🙂

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