Trees bend low with ripened fruit;
clouds hang down with gentle rain;
noble people bow graciously.
This is the way of generous things.
(Bhartṛhari was a great Sanskrit poet, writer and a king who renounced the world. भार्तृहरि एक महान राजा व संस्कृत कवि थे, जिन्हों ने अपनी पत्नी के धोखे से आहत हो कर सन्यास ले लिया था।)
Trees bend low with ripened fruit;
clouds hang down with gentle rain;
noble people bow graciously.
This is the way of generous things.
Birth is scented with death. ~~Bhartrihari
ख़्वाहिशों से बुने थे कुछ ख़्वाब
एक झटके में सारे ताने बाने बिखर गए.
हम समेटने में लगे हैं …….
यह जानते हुए कि जाना है एक दिन सबको .

(Bhartṛhari was a great Sanskrit poet, writer and a king who renounced the world. भार्तृहरि एक महान राजा व संस्कृत कवि थे, जिन्हों ने अपनी पत्नी के धोखे से आहत हो कर सन्यास ले लिया था।)
On Mahatma Gandhi 71st death anniversary
The day the power of love
overrules the love of power,
the world will know peace.

~~ Mahatma Gandhi
Kintsugi -golden repair”
In Japan, instead of tossing these pieces in the trash, some craftsmen practice the 500-year-old art of kintsugi, or “golden joinery,” which is a method of restoring a broken piece with a lacquer that is mixed with gold, silver, or platinum. … The gold-filled cracks of a once-broken item are a testament to its history.
जापान में, टूटे टुकड़ों को फेंकने के बजाय, कारीगर इसे सोने का पानी लगा कर जोङ देते हैं। यह 500 वर्ष पुरानी कला कीट्सुगी या “गोल्डन जोङ” कहलाती है। टूटे टुकड़े को सोने, चांदी , या प्लैटिनम से जोङा जाता है अौर यह सोने से भरी हुई दरारों वाली वस्तु ऐतिहास धरोहर बन जाती हैं।
Image from Internet.
Image courtesy Chandni .

इंसानियत में बसता हूं
और लोग मुझे मजहबों में ढूंढते हैं।
Image courtesy internet.
बांस एक तरह का घास है। चीनी बांस के पेड़ छह सप्ताह में 80 फुट लम्बे हो जाते है। यह बङी हैरानी की बात है। पर सच्चाई यह है कि इसे लगाने के चार वर्ष बाद तक इस में विकास के कोई चिन्ह नहीं दिखते। पर इसे पानी अौर पोषण उपलब्ध कराया जाता है। चार वर्ष के बाद पांचवें वर्ष में एक चमत्कार की तरह बांस के पेड़ सिर्फ छह सप्ताह में 80 फुट बढ़ जाते हैं।
यह चमत्कार नहीं है। इतने समय यह निष्क्रिय नहीं रहता। चार वर्षौं के दौरान बांस अपने अस्सी फुट ऊँचाई को संभालने के लिये अपनी जङों को बनाता अौर मजबूत करता रहता है। वर्ना यह अचानक अपनी 80 फुट लम्बी काया को संभाल नहीं सकेगा।
हम भी थोङे मेहनत के बाद हीं सफलता की कामना करने लगते हैं। जब कि जड़ें मजबूत बनने के लिये धैर्य अौर परिश्रम की जरुरत होती है। प्रतिकूल परिस्थितियों और चुनौती का सामना करने की शक्ति अौर सफलता संभालने के लिए मजबूत नींव बनने में समय लगता है। इस लिये असफलता से ङरने के बदले इसे जङों या आधार अौर नींव का निर्माण काल मानना चाहिये। जब एक घास में इतना सामर्थ है तब हम तो ईश्वार की सर्वौत्तम रचना हैं।
Source: अपनी जङें मजबूत करें – बांस की तरह (प्रेरक लेख / motivational thought )
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