
मान कर चलो कि ज़िंदगी में अच्छा…
सबसे अच्छा समय
अभी आना बाकी है।
अपने अंदर की रौशनी
कभी मरने न दो।
तुम्हारा अपना सर्वश्रेष्ठ
करना ही काफी है।

मान कर चलो कि ज़िंदगी में अच्छा…
सबसे अच्छा समय
अभी आना बाकी है।
अपने अंदर की रौशनी
कभी मरने न दो।
तुम्हारा अपना सर्वश्रेष्ठ
करना ही काफी है।

सूरज रोज़ निकलता है!
कोशिश मायने रखती है।
परिपूर्ण मत बनो,
वास्तविक बनो।
मान कर चलो कि ज़िंदगी
में अच्छा…
सबसे अच्छा समय
अभी आना बाकी है।

कुछ लोगों को लगता है,
वे हमेशा सही हैं।
उनसे सही दूरी
बनाए रखनी चाहिए।
क्योंकि ऐसे लोग
अपने वहम में ज़िंदगी
से कुछ सीखते ही नहीं।

ना दूरी ना नज़दीकी
रिश्ते बनाती या बिगड़ती है।
वह तो सरसब्ज़ ….सदाबहार
प्रीत और चाहत होती है।
राधा पास थी,
पर अपनी बनी नहीं।
मीरा सदियों दूर थी,
पर कान्हा उनके अपने थे।

इस दुनिया के मेले में,
लोगों को खोने से
परेशान न हो।
सब को खुश करने की
कोशिश में ,
रोज़ एक मौत ना मरो।
एक बात सीख लो!
खुद को खो कर खोजने और
संभलने में परेशानी बहुत है।

कहते हैं,
बुरा हो या भला हो,
हर वक्त गुजर जाता है।
पर कुछ वक्त कभी मरते नहीं,
कभी गुजरते नहीं।
जागते-सोते ख़्वाबों ख़्यालों में
कहीं ना कहीं,
शामिल रहते हैं।
ज़िंदगी का हिस्सा बन कर।
ऐसा भी क्या जीना?
पूरी ज़िंदगी साथ गुज़र गई।
पर ना अपने आप से बात हुई,
ना तन की रूह से मुलाक़ात हुई।

दीया
हर दीया की होती है,
अपनी कहानी।
कभी जलता है दीवाली में,
कभी दहलीज़ पर है जलता,
गुजरे हुए की याद का दीया
या चराग़ हो महफ़िल का
या हो मंदिर का।
हवा का हर झोंका डराता है, काँपते लहराते एक रात जलना और ख़त्म हो जाना,
है इनकी ज़िंदगी।
फिर भी रोशन कर जाते है जहाँ।

ज़िंदगी वह आईना है,
जिसमें अक्स
पल पल बदलता है।
इसलिए वही करो
जो देख सको।

ज़िंदगी के रंग – 225
ज़माने की राहें रौशन करते वक्त,
ग़र कोई आपकी सादगी भरी बातों के
मायने निकले।
समझ लीजिए
सामने वाले ने मन बना रखा है
आपकी बातों को नकारने का।
ना ज़ाया कीजिए वक्त अपना।
बेहिचक, बेझिझक बढ़ जायें
अपनी राहों पर।
लोगों को अक्सर देखा है,
चिराग़ों को बुझा,
हवा के झोंकों पर तोहमत लगाते।
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