मुस्कान Curvy cupid smile

Curvy Cupid smile of your  lips

may straighten up many problems of your life……..

होठों पर छाई तीरछी

मुस्कान भरी रेखा

जीवन की ना जाने

कितनी कठिनाइयों – परेशानियों

को सुलझा कर

सीधा कर  सकती हैं।

कठपुतली

हम समझते हैं कि

हम सब समझते हैं।

पर ऊपर बैठ,

जो अपनी ऊँगलीं के धागे से

हम सबों को नचा रहा है कठपुतली सा।

उसे हम कैसे भूल जाते हैं?

जीवन के रंग  – 31 सघन अँधेरा 


कालरात्रि सा सघन अँधेरा , 

आता  है जीवन में हर रोज़ .

पर 

आकाश के  एक एक कर 

बूझते सितारे,

करते है सूरज 

औ भोर की 

किरणों का आगाज …..

बस याद रखना है –

हर रात की  होती  है

 सुहानी भोर !!!



लोग

 

लोगों को पढ़ते- पढ़ते

यह समझ आया

कुछ लोग बदलते नहीं हैं
बस
बेपर्द हो जाते हैं……..

ठोकर

वक्त ने गुजरते-गुजरते

पलट कर पूछा –

जब भी होते हो खुश या दुखी ,

कहते हो – यह वक्त गुजर जायेगा।

फिर मेरे गुजरने पर याद क्यों करते हो?

हमने कहा, क्योंकि

तुम्हारी ठोकरों ने  हमें तराशा है………………

वज़ूद

अक्स  या परछांई बन कर रह जाने से अच्छा है,

मन की शांती खोये बिना, अपनी पहचान बनाये रखना।

 

तुलना

Accept your dear ones , as they are !!!!

आज कहीं कुछ पढ़ते हुए,

बरसों पुरानी अपनी ही बोली कुछ पंक्तियां याद आ गई  –

मेरी तुलना ना करो कोई…….

जैसी  हूँ बस मैं ऐसी ही हूँ !!!!!

मुझे  कविता से कहानी बनाने 

या 

 सुबह के सूरज के बदले, दिन का दमकता सूरज बनने ना कहो।

जैसी हूं वैसे ही रहने दो।

 इतने सालों बाद अपनी ही बातों 

        की गहराई अब समझ आती है …..

नमन !!

I stare at the sky at night…….. destiny has  taken away my brightest star, and it’s you my dad.    Wish you Best birthday!

लाखों शब्दों में भी कुछ अनुभव

एक तस्वीर नहीं बना सकती।

जैसे उन्मुक्त आकाश  का  ….

पूरा का पूरा चित्रण  नहीं होता।

स्मृति, यादें ….धरोहर रह गईं।

शेष हुई वह ज्योति, शेष हुआ  वह शंखनाद….

आज शब्दों मे बाँधे बिना नमन है !!!!

 

काल चक्र

जिंदगी के हसीन  पलों को

कितनी  भी बार कहो – थम जा !!

पर यह कब रुकता है?

पर दर्द भरे पलों का

बुलाअो या ना बुलाअो,

लगता है यह खिंचता हीं चला जा रहा है………

पता नहीं समय का खेल है या मन का?

पर इतना तो तय है –

वक्त बदलता रहता है………….

यह काल चक्र चलता रहता है।

जैसा भी समय हो,    बीत हीं जाता है ……….

 

 

 

रिश़्ते

 

हाथ पकङना साथ नहीं होता
हाथ छूटना , संबंध टूटना नहीं होता।

अकेले रिश्ते निभाये नहीं जाते,
जैसे एक हाथ से ताली बजाई नहीं जाती।

एक दूसरे के लिये इज़्जत और ईमानदारी हो तो
रिश़्तों का निभाना अौर निभना
अपने आप हो जाता है……