मौसम

हमारे अंदर भी  क्या बदलते मौसम हैं ?

क्या कभी  बसंत अौर कभी पतझङ  होते हैं ?

कभी कभी सुनाई देती है  गिरते पत्तों की उदास सरसराहट

या शरद की हिम शीतल खामोशियाँ

अौर कभी बसंत के खिलते फूलों की खुशबू….

ऋतुअों अौर मन का यह  रहस्य

बङा अबूझ है………

 

 

कठपुतली

हम समझते हैं कि

हम सब समझते हैं।

पर ऊपर बैठ,

जो अपनी ऊँगलीं के धागे से

हम सबों को नचा रहा है कठपुतली सा।

उसे हम कैसे भूल जाते हैं?

जीवन के रंग  – 31 सघन अँधेरा 


कालरात्रि सा सघन अँधेरा , 

आता  है जीवन में हर रोज़ .

पर 

आकाश के  एक एक कर 

बूझते सितारे,

करते है सूरज 

औ भोर की 

किरणों का आगाज …..

बस याद रखना है –

हर रात की  होती  है

 सुहानी भोर !!!



रिश़्ते

 

हाथ पकङना साथ नहीं होता
हाथ छूटना , संबंध टूटना नहीं होता।

अकेले रिश्ते निभाये नहीं जाते,
जैसे एक हाथ से ताली बजाई नहीं जाती।

एक दूसरे के लिये इज़्जत और ईमानदारी हो तो
रिश़्तों का निभाना अौर निभना
अपने आप हो जाता है……

रंगों का खेल

 

वह सफेद लिबास में, सफेद गुलदस्ते सी थी,

घर वालों को चाहिये थी लाली वाली दुलहन। 

यह शादी, मैरेज अौर निकाह के बीच का फासला

प्रेम, इश्क, लव व इबादत

सब कुछ तोङ गई।

चिराग की फितरत

जिस राह पर हर बार  मुझे

अपना कोई छलता रहा ।

फिर भी ना जाने क्यों मैं

उसी राह ही चलता रहा।

सोंचा इस बार….

रौशनी नहीं धुआँ दूँगा।

लेकिन चिराग था फितरत से,

जलता रहा..

  जलता रहा……

 

Anonymius

इम्तहान

 

जिंदगी के सफर में

सारे इम्तहान हमारे हीं हिस्से क्यों?

नतीज़े आये  ना आये ,

 अगला पर्चा शुरु हो जाता है

हिना – कविता

हमने तो जिंदगी को कभी ना जाँचा ना परखा ना इम्तहान लिया,

फिर यह क्यों रोज़ नये इम्तहान लेती,  परखती रहती है?

सोने की तरह कसौटी पर कस कर अौर कभी

पत्थर पर घिस कर हिना बना हीं ङालेगी  शायद।

कहते हैं

रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद ……..

वर्षा – कविता 

मुम्बई  की रिमझिम वर्षा की फुहारें

 गंदलाये समुन्द्र की उठती पटकाती   लहरे,

आसमान से  नीचे झुक आये धुंध  बने बादल , 

सीकते भुट्टो की सोंधी  खुशबू 

 देख  फुहारों में भीगने का दिल हो आया. …..

बाद में  कहीँ  नज़र आया 

 टपकती  झोपड़ियों में भीगते ठिठुरते बच्चे ,

यह मेह किसी के लिये मजा और किसी की सजा है.

 बाहर का बरसात,  अंदर आँखो के रस्ते बरसने  लगा.

 

Image from internet.

जिंदगी के रंग- कविता 15

 जिंदगी ने बहुत से दर्द भरे सबक दिये, 

 उन्हें  पन्नों पर उतारते-उतारते ,

फिर से……………

इश्क हो गया  जिंदगी,  कलम  अौर कागज  से

आप   इन्हें जो चाहे कहें,

जिंदगी के रंग,  जिंदगी के फलसफे, तजुर्बे या कविता……….