बिना मुझसे पूछे,
बिन मेरे अनुमति।
तुमने मेरे पत्थरों से
बनाया था आशियाँ अपना।
बस मैं उसे हीं वापस ले जा रही हूँ,
अपनी बहती धार में।
तब तुम शक्तिशाली थे।
आज़ मैं प्रचंड हूँ।

बिना मुझसे पूछे,
बिन मेरे अनुमति।
तुमने मेरे पत्थरों से
बनाया था आशियाँ अपना।
बस मैं उसे हीं वापस ले जा रही हूँ,
अपनी बहती धार में।
तब तुम शक्तिशाली थे।
आज़ मैं प्रचंड हूँ।


जिस्म तो पेड़, पहाड़
औरत, पुरुष सभी के होते है।
ना जाने यह जुनून, यह सौंदर्य-बोध कब बना,
जिसमें नारी और पुरुष सिर्फ़
जिस्म सौंदर्य से मापे जाने लग़े।
आज के सौंदर्यशास्त्र में किसी को चाहिए,
जीरो फ़िगर, किसी को चाहिए मसलस।
लीपोसक्शन या मिले सिन्थेटिक सिंथोल से।
सेहत का जो भी हो।
हुस्न, जिस्म से आगे भी होता है,
यह ख़्याल क्यों नहीं आता ज़ेहन में?
Synthol is a substance used by body builders as a temporary implant which is injected deeply into the muscle. The enlargement effects are immediate. Synthol is used to enlarge their volume (for example triceps, biceps, deltoids, muscles of the calf). The side effects of synthol are manifold and they can also cause a damage of nerves.

पूछा जलते और ढलते सूरज ने।
तपन के बावजूद हम साज़िश करते रहते है
ताकि चाँद तुम दमक सको
मेरी प्रतिबिंबित रोशनी से।
मिलन ना लिखा हो हमारा।
पर ख्वाहिश है कि
चाँद तेरी दूधिया चाँदनी चमके
आफ़ताब….सूरज की रौशनी से।

Topic by yourquote
जिसका लेखक, डायरेक्टर सब है ऊपरवाला,
और मुख्य पात्र हैं हम।
कब क्या होगा, किसी को नहीं मालूम।
नए नए ट्विस्ट और टर्न के साथ
अग़ल दृश्य हमेशा है एक मिस्ट्री।
दृश्य है बदलते रहते।
बस नहीं रहता
किसी को इस
फ़िल्म के द एंड
या अंत का इंतज़ार।

Topic by YourQuote.
दूसरों को दर्द देने वाले को
मालूम होती है ख़ता अपनी।
क्यों जाया करना लफ़्ज इन पर?
इन्हें ना दे बद-दुआ, पर तय है
दुआओं में नाम ना होगा इनका।
जब कोई चोट और दर्द दे कर,
अपनी हीं तकलीफ़ का राग सुनाता है,
तब एक पुरानी कहावत याद आती है –
सूप बोले तो बोले, चलनी बोले जिसमें सौ छेद।
Psychological Fact – One may end up feeling exhausted, depressed, anxious, frustrated, and physically sick when Toxic people act as a victim.

क्यों आज़ लोग खुश और संतुष्ट नहीं?
क्यों लोग स्वयं को नहीं, दूसरों को देख रहें हैं?
आध्यात्मिक-मानसिक प्रगति से दूर,
भाग रहें हैं भौतिक प्रगति की ओर।
पर है स्वयं के गोली-बारी, हिंसा से लहू-लुहान।
गीता ने सदियों पहले बताया,
जो तुम्हारे पास है उसमें संतुष्ट, ख़ुश रहना सीखो,
क्योंकि ख्वाहिशें तो अनंत हैं।
सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः।।12.14।।
अर्थ- संयतात्मा दृढ़निश्चयी योगी सदा सन्तुष्ट है।
जो अपने मन और बुद्धि को मुझमें अर्पण किये हुए है?
वह मुझे प्रिय है। (भगवद् गीता अध्याय 12 श्लोक 14)

Salman Rushdie Stabbed In Neck At New York Event, Taken To Hospital. https://www.ndtv.com/world-news/author-salman-rushdie-attacked-on-stage-at-an-event-in-new-york-news-agency-pti-3249899/amp/1

मृत यादें मर कर भी दर्द देतीं है।
ग़र अतीत के घाव नहीं भरे
तो वे रिसते रहेंगे।
यादों के दाग,
ज़ख्मों के जलन
अपने होने का एहसास देते रहेंगे।
अतीत से समझौता कर
आगे निकल जाना ज़रूरी है।

ज़िंदगी के शतरंज पर
सम्बंधों की गोटियाँ ना खेलो।
ग़र किसी की ज़्यादती
बिना जवाब दिए झेल गए,
तब जवाब ऊपरवाला देता है।
महाभारत रचने में महारत रखने वालों
का भी यही हश्र हुआ था।

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