
उसकी याद


उजले ख़्वाब देख, इश्क़ किया सितारों ने।
चाँद की चाँदनी में दिखे नज़ारों में।
सजी सितारों की बारात आकाश गंगा की बहारों में।
देखा सितारों को एक होते, सितारों में।
उम्र भर की तलाश पूरी हुई शायद।
डूब गए एक दूसरे की आँखों में ज़ायद।
ख़ूबसूरत है कायनात की क़वायद।
न्यूज़- दो आकाश गंगा का विलय।
Two Far-Off Galaxies Are Merging In
Amazing New Pic From Hubble
Telescope Merging galaxies captured
by Hubble.



चाँद हो आग़ोश में,
तो सितारों से उल्फ़त नहीं करते।
रौशन हो जहाँ आफ़ताब से,
तो जुगनुओं की रौशनी पर नहीं मरते।

जब अपनी चाँदी सी सुकून भरी चाँदनी भर देता हैं चाँद,
खुली खिड़कियों से कमरे में।
तब हम अक्सर गुफ़्तगू करते हैं चाँद और सितारों से।
वातायन से झाँकता चाँद हँस कर कहता है,
दूरियाँ-नज़दीकियाँ तो मन की बातें है।
कई बार लोग पास हो कर भी पास नहीं होते।
रिश्तों में बस शीतलता, सुकून और शांति होनी चाहिए।
देखो मुझे, जीवन में घटते-बढ़ते तो हम सब रहते हैं।
मुस्कुरा कर सितारों ने कहा हैं-
याद है क्या तुम्हें?
हमें टूटते देख दुनिया अपनी तमन्नाएँ औ ख़्वाहिशें
पूरी होने की दुआएँ माँगती है, हमारा टूटना नहीं देखती।
फिर भी हम टिमटिमाते-खिलखिलाते रहते हैं।
कभी ना कभी सभी टूटते औ आधे-अधूरे होते रहतें हैं।
बस टिमटिमाते रहो, रौशनी और ख़ुशियाँ बाँटते रहो।
क्योंकि सभी मुस्कुराहटों और रौशनी की खोज़ में है।


गीली पलकों पर
आँसुओं के चमकते
सितारे देख
आसमान के टिमटिमाते
सितारों ने झुक कर पूछा –
क्या जमीं पर नयनों से
सितारे बोना है?
क्यों है, मायूस चेहरा
और आँखों में आँसू ?
इनसे कुछ मिलेगा क्या?
नहीं ना?
अब ज़रा मुस्कुरा कर जी लो।
मान कर जियो कि
तुम्हारे पास मुस्कुरा कर
जीने के अलावा रास्ता नहीं।
फिर देखो,
ज़िंदगी, अँधेरा दूर कर
कैसे जलाती हैं
ख़ुशियों के चिराग़ ।
कालरात्रि सा सघन अँधेरा ,
आता है जीवन में हर रोज़ .
पर
आकाश के एक एक कर
बूझते सितारे,
करते है सूरज
औ भोर की
किरणों का आगाज …..
बस याद रखना है –
हर रात की होती है
सुहानी भोर !!!
कशमकश में दिवस बीत गया….
सूरज धुल कर चाँद हो गया।
तब
आसमान के झिलमिलाते सितारों ने कहा –
हौसला रखो अौर आसमान चुमने की कोशिश करो।
क्योकिं अगर
उतना ऊपर ना भी पहुँच सके,
तब भी हम सितारों तक
तो जरुर पहुँच जाअोगे!!!

आसमान में झिलमिलाते सितारे ,
जगमगाता रौशन चाँद ….
खो गए
अमावस के अँधेरे में.
और धीरे से कहा –
जिंदगी के रंगो को देखो ….
टूटना और जुटना सीखो.
हम भी तो आधे -अधूरे -पूरे होते रहते है.
यह चक्र तो चलता ही रहता है.
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