इन परिंदों की उङान देख,
चहचहाना सुन ,
रश्क होता है।
कितने आज़ाद हैं……
ना बंधन, ना फिक्र कि …….
कौन सुनेगा ….क्या कहेगा…….
बस है खुली दुनिया अौर आजाद जिंदगी।
इन परिंदों की उङान देख,
चहचहाना सुन ,
रश्क होता है।
कितने आज़ाद हैं……
ना बंधन, ना फिक्र कि …….
कौन सुनेगा ….क्या कहेगा…….
बस है खुली दुनिया अौर आजाद जिंदगी।
जिंदगी के रंग निराले
जो कभी खून करना चाहते थे, उन्हें खून देते देखा।
जो जान लेना चाहते थे, उन्हें जान देते देखा
जो लाखों लोगों का दिल धङकाते थे,
उन्हें एक-एक धङकन के लिये मोहताज़ होते देखा।
जिनके लिये लाखों दुआएँ मागीं , उन्हें बद्दुआ देते देखा।
दिल में जगह देनेवालों को दिल तोङते देखा।
इन सब के बाद भी जीने की जिद देखी।
बङी अजीब पर नशीली अौ हसीन है यह दुनिया…………….
In 1996 the United Nations General Assembly proclaimed that 7 December was to be the International Civil Aviation Day.
The day has been celebrated by the International Civil Aviation Organization since 7 December 1994, the 50th anniversary of the signing the Convention on International Civil Aviation.[1] The purpose of the day is to recognize the importance of aviation, especially international air travel, to the social and economic development of the world.
7 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन दिवस
अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन ने 7 दिसंबर 1 99 4 से अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन पर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने की 50 वीं वर्षगांठ का दिन मनाया। इस का उद्देश्य दुनिया के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए विमानन, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के महत्व को पहचानना है।
Courtesy Google.
India, a fastest growing economy and an attractive investment destinations in the world is organising “World Food India 2017” in New Delhi from 03-05 November, 2017. This is the largest international event in food processing organised by Government of India .
03-05 नवंबर, 2017 नई दिल्ली में “वर्ल्ड फूड इंडिया 2017” का आयोजन हो रहा है। भारत सरकार द्वारा आयोजित खाद्य प्रसंस्करण का यह सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन है। भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और दुनिया में एक आकर्षक निवेश स्थल है। यह एक बङी उपलब्धी है।
Its website: http://www.worldfoodindia.in.
सारी दुनिया की रीत- रिवाजों को पढ़ा।
ना जाने कितनी सारी किताबें को पढ़ा।
पर नहीं पढ़ा , तो बस अपने आप को।
सारी कायनात को पढ़ कर समझ आया……
अपने अंदर हीं है
सारी कायनात, दुनिया अौ सारी खुदाई।
नजरे झुकाई, हाथों को जोङा
अौर
झुक गये ऊपर वाले की बंदगी में।
पर दुनिया का गुरुर तो देखो ,
सामने वाले ने
मान लिया अपने को भगवान !
समझौता, भोलापन, भरोसा हँस पङे।
बोले हमारे साथ रहने वाले का यही हश्र होता है
पर एक बात है!
हम जिंदगी का आईना अौर दुनिया की असलियत जरुर दिखा देतें हैं।
image from internet.

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I love my blog world. Its a beautiful , positive and colorful world. Above all , there are no man made boundaries and religion, We may share any thing and everything with our blogger friends.

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