खामोशी

ख़ामोशी की क़दर करने वाले लोग,

हर लम्हें जीते हैं।

सही वक़्त मिले, दिल मिलें।

गुलिस्ताँ में गुलाब से लगाने वाले

अपने जैसे लोग मिलें।

दिल की बातें दिलों तक जाए।

तब कम बोलने वाले भी क्या ख़ूब बोलते हैं।

Psychological Fact- Quiet people are actually very talkative around the right people.

दिल की बातें

किसी और की बातों

और राय को बोझ

ना बनने दो।

सुन सब की लो।

पर सुनो अपने दिल की।

इश्क़

कुछ मोहब्बतें

जलतीं-जलातीं हैं।

कुछ अधुरी रह जाती हैं।

कुछ मोहब्बतें अपने

अंदर लौ जलातीं हैं।

जैसे इश्क़ हो

पतंग़े का चराग़ से,

राधा का कृष्ण से

या मीरा का कान्हा से।

ठहराव

तकरार औ इकरार हो,

शिकवे और गिले भी।

पर ठहराव हो, अपनापन,

भरोसा और सम्मान हो,

ग़र निभाने हैं रिश्ते।

वरना पता भी नहीं चलता।

आहिस्ता-आहिस्ता,

बिन आवाज़

बिखर जातें हैं रिश्ते,

टूटे …. शिकस्ते आईनों

की किर्चियों से।

ज़िंदगी के रंग – 225

हर दिल में कितने

ज़ख़्म होते हैं….

ना दिखने वाले।

कुछ चोट, समय के

मरहम से भर जातें हैं।

कुछ रिसने वाले

नासूर बन, रूहों तक

उतर जातें हैं।

धीरे-धीरे ज़िंदगी

सिखा देती है,

दिल में राज़ औ लबों

पर मुस्कुराहट रखना।

लफ़्ज़

लफ़्ज़ों के वजूद को समझो।

दिल में उतरने के लिए और

दिल से उतारने के लिए

कुछ बोले और अबोले लफ़्ज़

हीं काफ़ी हो

 

पहचान

लोगों के चेहरे देखते देखते ज़िंदगी कट गई।

चेहरे पहचानना अभी तक नहीं आया।

मेरी बातें सुन आईना हँसा और बोला –

मैं तो युगों-युगों से यही करता आ रहा हूँ।

पर मेरा भी यही हाल है।

मनचाहा दिखने के लिए,

लोग रोज़ नये-नये चेहरे बदलते रहते हैं।

सौ चेहरे गढ़,

कभी मुखौटे लगा, रिश्वत देते रहते हैं।

पल-पल रंग बदलते रहते हैं।

चेहरे में चेहरा ढूँढने और पहचानने की कोशिश छोड़ो।

अपने दिल की सुनो,

दूसरों को नहीं अपने आप को देखो।

सुकून

सागर के दिल पर तिरती- तैरती नावें,

याद दिलातीं हैं – बचपन की,

बारिश अौर अपने हीं लिखे पन्नों से काग़ज़ के बने नाव।

 नहीं भूले कागज़ के नाव बनाना,

पर अब ङूबे हैं  जिंदगी-ए-दरिया के तूफान-ए-भँवर में।

तब भय न था कि गल जायेगी काग़ज की कश्ती।

अब समझदार माँझी  

कश्ती को दरिया के तूफ़ाँ,लहरों से बचा

तलाशता है सुकून-ए-साहिल।

 

ख्वाब

कहानी