Tag: जिंदगी
लगता है जिंदगी कुछ खफा है
जिंदगी के रंग -23
अहले सुबह जिंदगी आई कुछ मसले व परेशानियाँ ले कर ।
शाम ढले चौखट पर खङी थी मुस्कुराती
अौर पूछ बैठी –
दर्द हुआ क्या?
चोट
लगी क्या?
जवाब दिया –
बिना कसूर के मिली सजा,
दर्द तो बङा देती है
पर, तुझसे क्या शिकायत ऐ जिंदगी ???
तु तो रंग दिखा रही है…..
सबक अौ तजुर्बे सीखा रही है।
Living in the heart
Sit with Lovers
and choose their state.
Do not stay long
with those who are
not living in the heart.
~ Beloved Rumi ~ ❤️❤️
जिंदगी के रंग – 20
कङवी या मीठी-मृदु,
सबकी जिंदगी है एक कहानी।
कुछ हँसाती, कुछ रुलाती,
रसीली या निरस
जहाँ
अपनों को अपना बनाये रखने की कोशिश में
पराये तो अपने हो जाते हैं,
पर कुछ अपने अौर कुछ सपने हीं खो जाते हैं।
जिंदगी के रंग 19 – रौशन चाँद

आसमान में झिलमिलाते सितारे ,
जगमगाता रौशन चाँद ….
खो गए
अमावस के अँधेरे में.
और धीरे से कहा –
जिंदगी के रंगो को देखो ….
टूटना और जुटना सीखो.
हम भी तो आधे -अधूरे -पूरे होते रहते है.
यह चक्र तो चलता ही रहता है.
उफान – कविता

कुछ क़तरे दूध के ,
उबलते पानी में उफान लाने के लिये काफी है.
जिंदगी के उतार चढाव में भी
कुछ क़तरे जोश के हो
तो मंजिल पाने के लिये काफी है.
जिंदगी के रंग- कविता 15
जिंदगी ने बहुत से दर्द भरे सबक दिये,
उन्हें पन्नों पर उतारते-उतारते ,
फिर से……………
इश्क हो गया जिंदगी, कलम अौर कागज से
आप इन्हें जो चाहे कहें,
जिंदगी के रंग, जिंदगी के फलसफे, तजुर्बे या कविता……….
जिंदगी के रंग- 13
किसी ने ग़ालिब से पूछा – …..”कैसे हो?” ग़ालिब ने हँस कर कहा –
जिंदगी में ग़म है……
ग़म में दर्द है………….
दर्द में मज़ा है ………
अौर मज़े में हम हैं।
गूंज
हम अपने बोले शब्दों के गूजं अौर मौन के बीच रहते हैं
हमारे अपने विचारों से बनता है हमारी जिंदगी का आशियाना।
Image from internet.
जिंदगी के रंग (कविता – 5)
जीवन के इंद्रधनुषी सफर में
हजारो रंग नज़र आते है,
परायों को अपना कहनेवाले
अच्छों को बुरा कहने वाले
कहीँ ना कहीँ मिल जाते है
रोज़ सफेद -काले और
सतरंगी जिंदगी नज़र आती है
जिंदगी रोज़ नये रंग दिखाती है।
Source: जिंदगी के रंग (कविता – 5)
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