सफलता के साँचे में
ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में
तपना और चलना होगा।

सफलता के साँचे में
ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में
तपना और चलना होगा।

जैसे चाहो, जी लो ज़िंदगी।
वापस लौटने की नहीं है गुंजाइश,
बस इतनी है शर्त-ए-ज़िंदगी।

जिसका लेखक, डायरेक्टर सब है ऊपरवाला,
और मुख्य पात्र हैं हम।
कब क्या होगा, किसी को नहीं मालूम।
नए नए ट्विस्ट और टर्न के साथ
अग़ल दृश्य हमेशा है एक मिस्ट्री।
दृश्य है बदलते रहते।
बस नहीं रहता
किसी को इस
फ़िल्म के द एंड
या अंत का इंतज़ार।

Topic by YourQuote.
ज़िंदगी के शतरंज पर
सम्बंधों की गोटियाँ ना खेलो।
ग़र किसी की ज़्यादती
बिना जवाब दिए झेल गए,
तब जवाब ऊपरवाला देता है।
महाभारत रचने में महारत रखने वालों
का भी यही हश्र हुआ था।

अक्सर लड़कियाँ को सबक़ – ढके रहना सीखो।
सहना-चुप रहना सीखो, कहना नहीं।
लड़कों के सबक़ होतें हैं – लड़के हो, रोना नहीं,
आँसू नहीं बहाना, ज़िम्मेदार और मज़बूत रहना।
अंदर हीं अंदर घुटती भावनाओं
और दर्द के नासूर का क्या करना?
अपनी तकलीफ़-पीड़ा किसे है बतानी?
अपने लिए खड़े होना कौन सिखायेगा?
सच तो यह है –
भावनाओं और दर्द से भरा बारूद ना बन,
पहले ख़ुद से, अपने दिल-दिमाग़-रूह से प्यार कर।
खुशहाल ज़िंदगी के हक़दार है हम सब।

ज़िंदगी वह गुरु है
जो पर्चे शागिर्दों को देख कर नहीं बनाती है।
बल्कि वह अच्छे शागिर्दों को
कठिनतम इम्तहानों के लिए चुनती हैं।
और यह सिखाती है कि
इस दुनिया में जीवट हीं टिकते हैं –
“सरवाईवल औफ़ द फ़िटेस्ट”।
इसलिए अगर लगे ज़िंदगी कठिनाइयों भरी है।
इसका मायने है, ज़िंदगी ने चुना है तुम्हें,
ख़ास मक़सदों के लिए।

खुल कर साँसें लो। आज़ाद छोड़ दो अपने आप को।
तुम, तुम रहो। किसी के बनाए साँचें में बेमन से ना ढलो।
जैसे हो वैसे हीं स्वीकार करो अपने आप को।
इश्क़ करना सीखो अपने आप से।
जीतने की कोशिश करो,
पर मुस्कुराओ अगर हार भी जाते हो।
क्योंकि हम सब अपनी अपूर्णता,
कमियों और खामियों के साथ परिपूर्ण हैं।
वही अनूठापन है, वही हमारी पहचान है।
Psychological Fact – Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness. Self-love means taking care of your own needs and not sacrificing your well-being to please others.

दिया तुमने दर्द औ तकलीफ़।
ज़रूर कुछ सिखा रहे हो,
कुछ बता रहे हो।
डिग्री नहीं, सच्चे सबक़ नज़रों
के सामने ला रहे हो।
जानते हैं गिरने ना दोगे।
हाथ पकड़ कर चलना सीखा रहे हो।


ज़िंदगी के सफ़र में लोग आते हैं।
कुछ दूर कुछ साथ निभाते हैं।
कुछ क़ाफ़िले में शामिल हो
दूर तलक़ जातें हैं।
कुछ मुस्कान और कुछ
आँसुओं के सबब बन जातें हैं।
कुछ ख़्वाबों में बस कर
रह जातें हैं।

इनायत
अँधेरे पल हो या उजाले,
ज़िंदगी की सारी लड़ाईयाँ
हम ने तुम्हारे भरोसे लड़ी,
तुम्हारी रज़ा और
इनायत के साये में।
ना किया तुमने
कभी कोई वादा,
पर दर्मियान हमारे-तुम्हारे
भरोसे का वो रिश्ता है
कि तुमने कभी
निराश नहीं किया।
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