रंग बदलता सूरज

सुबह का ऊगता सूरज,

नीलम से नीले आकाश में,

लगता है जैसे गहरे लाल रंग का माणिक…..रुबी…. हो,

अंगूठी में जङे नगीने की तरह।  

दूसरे पहर में विषमकोण में  कटे हीरे

की तरह आँखों को चौंधियाने लगता है ।

सफेद मोती से दमकते चाँद के आगमन की आगाज़ से

शाम, पश्चिम में अस्त होता रवि रंग बदल फिर

पोखराज – मूंगे के पीले-नारंगी आभा से

रंग देता है सारा आकाश।

रंग बदलते सूरज

की रंगीन रश्मियाँ धरा को चूमती

पन्ने सी हरियाली से 

  समृद्ध करती हैं…

 

image courtesy  google.

चाँद The moon

उस रात पूरा  चाँद थोड़ा 

मेरी ओर झुक आया ..

हँसा …..

बोला …..

अब फिर अमावस का अँधेरा मुझे घेरने लगेगा .

पर मैं हार नहीँ मानता कभी .

जल्दी ही पूरा हो कर 

फ़िर आऊँगा …

शब्बा  ख़ैर ! ! ! ! 

अोस नहीं अश्क

गगन से झुक कर पूछा चाँद ने

क्यों आँसू बहा रहे हो?

सामना करो कठिनाईयों का

किसी को फिक्र नहीं तुम्हारे  अश्रुयों की । 

लोग इन पर कदम रखते गुजर जायेंगें।

क्योकिं

जिन पर तुम्हारे कदम पङे हैं

वे अोस नहीं मेरे अश्क हैं।

सूरज धुल कर चाँद

 

कशमकश में दिवस बीत गया….

सूरज धुल कर चाँद हो गया।

तब

आसमान के झिलमिलाते सितारों ने कहा –

हौसला रखो अौर आसमान चुमने की कोशिश करो।

क्योकिं अगर

उतना ऊपर ना भी पहुँच सके,

तब भी हम सितारों तक 

 तो जरुर पहुँच जाअोगे!!!

ख्वाब अौर यादें

हर शाम  अौ रात ख्वाबों अौर यादों के
समंदर में गुजरती है
लेकिन
पानी में हाथ ङालते  चाँद,
हिल कर खो जाता है…..

 जिंदगी के रंग  19  – रौशन चाँद 


आसमान में झिलमिलाते  सितारे  , 

जगमगाता रौशन चाँद ….

खो गए  

अमावस के अँधेरे में.

और धीरे से  कहा –

जिंदगी के रंगो को  देखो  ….

टूटना और जुटना सीखो.

हम भी तो आधे -अधूरे -पूरे होते रहते है.

यह चक्र तो चलता ही  रहता है. 

नाम -कविता 

खिला खिला गुलमोहर तपिश में मोहरें लूटाता रहा…..

पूरा चाँद,  रात भर  जल कर चाँदनी बाँटता  रहा.

ना पेड़ों ने कहीँ अपना नाम लिखा ना शुभ्र गगन में चाँद ने.

और हम है घरों – कब्रों पर अपना नाम लिखते रहते है.

 

half

 

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