वक्त ने गुजरते-गुजरते
पलट कर पूछा –
जब भी होते हो खुश या दुखी ,
कहते हो – यह वक्त गुजर जायेगा।
फिर मेरे गुजरने पर याद क्यों करते हो?
हमने कहा, क्योंकि
तुम्हारी ठोकरों ने हमें तराशा है………………
वक्त ने गुजरते-गुजरते
पलट कर पूछा –
जब भी होते हो खुश या दुखी ,
कहते हो – यह वक्त गुजर जायेगा।
फिर मेरे गुजरने पर याद क्यों करते हो?
हमने कहा, क्योंकि
तुम्हारी ठोकरों ने हमें तराशा है………………
रेत पर, तपते रेगिस्तान में
खिल आये कैक्टस
ने बिना ङरे
चटक रंगों को बिखेरा।
किसी ख़ूबसूरत नज़्म या कविता की तरह ……
गर्म बयार अौर
आग उगलते सूरज
ने नन्हे से कैक्टस के हौसले देख
नज़रें झुका ली ।
सपने, कविता ,ग़ज़ल, शायरी में तो जमीं आसमां अौ सारे जहाँ मिल जाते हैं..
पर उनसे बाहर निकलो , तब मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ।
जेहन में उमङते-घुमङते विचार,
पन्नों पर शब्दों का जाल बना लिख ङालो,
तब
कविता बन जाती है………..
वरना,
ये उङ जाते हैं,
रंग-बिरंगी तितलियोँ की तरह।
शायद …. किसी अौर फूल पर !!!!
मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 4
इस दुनिया मॆं मैने
आँखें खोली.
यह दुनिया तो
बड़ी हसीन
और रंगीन है.
मेरे लबों पर
मुस्कान छा गई.
तभी मेरी माँ ने मुझे
पहली बार देखा.
वितृष्णा से मुँह मोड़ लिया
और बोली -लड़की ?
तभी एक और आवाज़ आई
लड़की ? वो भी सांवली ?
Source: मैं एक लड़की ( कविता 1 )
In Greek mythology, phoenix is a long-lived bird that is cyclically regenerated or reborn. Associated with the Sun, a phoenix obtains new life by arising from the ashes . may symbolize renewal
फ़ीनिक्स एक बेहद रंगीन पक्षी होता है । जिस की चर्चा प्राचीन मिथकों व दंतकथाओं में पाया जाता है। माना जाता है कि वह मर कर भी राख से पुनः जी उठता है।

Images from internet.
Pune civic polls: At 56, she waits to walk with pride, sporting blue ink on finger
Namira Shaikh, along with 43 other sex workers, will receive their voter identity cards on January 25, National Voters’ Day. ( News -The Indian Express ,PUNENewsLine Tuesday January 24, 2017)
उनका क्या जो गिनती में नहीं हैं,
पुत्री, पत्नी या वधु नहीं मात्र नगरवधु है।
पण्यै: क्रोता स्त्री ( रुपया देकर आत्मतुष्टि के लिए खरीदी गई नारी),
वेश्या, गणिका, वारवधू, लोकांगना, नर्तकी कह
शतकों से प्रेयशी – रक्षिता बन ,
मन बहलाती रही।
उस का प्रवेश निषिद्ध क्यों सभ्य समाज में ?
जीवन-मृत्यु में उसकी गिनती हीं नहीं।
चलो, उन्हें गिनने का, ऊपर उठाने का विचार तो आया।
शब्दार्थ – word meaning
वेश्या, गणिका, वारवधू, लोकांगना,रक्षिता,नगरवधू, पण्यै: क्रोता स्त्री- रुपया देकर आत्मतुष्टि के लिए खरीदी गई नारी -Prostitute.
शतकों – Centuries.
प्रवेश निषिद्ध -No entery.
सभ्य समाज -Civilised society.
Image courtesy – internet.

8 बजे तक के धन, 8:15 में बेकार कागज बन गये।
पर काले धन खत्म होने की बातों ने,
देशभक्ति की भावना भर दी।
कुछ बचाये -छुपाये छुट्टे पैसे ले
बाजार गई।
बङी सस्ती सब्जियाँ अौर रोते किसान मिले।
मातम करती कामवालियों अौर
गोलगप्पे की जिद करती बिटिया से
नजरें बचाती, खाली एटीम अौर पर्स देख
प्लास्टिक धन ले माॅल पहुचीँ।
उन्हीं सब्जियों को 5-10 गुणा मंहगा पाया।
क्यों नहीं देखते –
हमारा पैसा कहाँ है जाता?
कुछ समझ नहीं आता,
जो हो रहा है कितना सही या गलत है,
कोर्ट अौर नेताअों की सौ बातें सुन,
कुछ समझ नहीं आता।
शब्दार्थ –
प्लास्टिक धन- Plastic Money
Indispire -144

In Turkmenistan (1971) a natural gas field of Methane was found. To prevent the spread of methane gas, geologists set it on fire and it has been burning continuously since then. It is known as the Gate to Hell/ Door to Hell / the Crater of Fire/ Darvaza Crater
तुर्कमेनिस्तान में 1971 में शक्तिशाली ग्रीन हाउस व महत्वपुर्ण उर्जा स्त्रोत गैस ” मीथेन ” का एक बहुत बङा भंङार मिला। संभाल ना पाने पाने पर इसमें आग लगा दिया गया। आज इसे विभिन्न ङरावने नामों से पुकारा जाता है – नरक द्वार / ज्वालामुखी का जलता मुख / नरक के दरवाजे /पाताल का द्वार .
प्रकृति ,धरती अौर सागर,
ने दिया इतना कुछ।
धरा का सीना चीर करते रहे दोहन।
अौर जब संभ्भाल नहीं पाये हम.
तब बचने के लिये लगा दिया आग।
अौर ४० वर्ष से इस जलते धधकते आग के
गोलाकार , ज्वालामुखी के मुख को
हमने दे दिया नाम “नरक का द्वार”
आश्चर्य है, समय-समय यहाँ आने वाली हजारों मकड़ियां,
क्या वे भी हमारी तरह यहां घूमने चली आती हैं?
पर्यटक हैं?
या बनाती हैं हमारी नासमझी का उपहास अौर मातम?
Image from internet.
क्या भविष्य को संजोने की लालसा
हमारी व्याकुलता अोर चिंता को बढ़ाती है?
नहीं, भविष्य के सपने सजाना
तो मनुष्य होने की
पहचान है।
यह व्यग्रता, उद्वेग तो
स्वंयसिद्ध , सर्वशक्तिमान बन
भविष्य को नियंत्रित करने की कोशिश का परिणाम है…….
You must be logged in to post a comment.