Stay Happy, Healthy and Safe – 71
सूफी परंपरा में ईश्वर को हमेशा प्रेमी के रूप में देखा गया है. दरवाजा केवल उन लोगों के लिए ही खुलता है, जो अपने को उसके प्रेम में खो चुके होते हैं. “
कहानी
Stay happy, healthy and safe – 70
सूफी परंपरा में ईश्वर को हमेशा प्रेमी के रूप में देखा गया है. यह दरवाजा केवल उन लोगों के लिए ही खुलता है, जो अपने को उसके प्रेम में खो चुके होते हैं.
सदायें
मिट्टी
विचारों के गहरे सागर में अकेले
ङूबते-उतराते मन में एक ख्याल,
एक प्रश्न आया।
हम सब मिट्टी से उपज़ें हैं,
एक दिन मिट्टी में मिल जायेंगें।
यह जानते हुए भी,
जीवन से मोह इतना गहरा क्यों होते है?
Stay happy, healthy and safe – 69
सूफी परंपरा में ईश्वर को हमेशा प्रेमी के रूप में देखा गया है. यह दरवाजा केवल उन लोगों के लिए ही खुलता है, जो अपने को उसके प्रेम में खो चुके होते हैं.
The whole universe is sum up in the Human Being.
Devil is not a monster waiting to trap us,
He is a voice inside.
Look for Your Devil in Yourself,
not in the Others.
Don’t forget that the one who knows his Devil,
knows his God.
संपूर्ण ब्रह्मांड मानवों से बना है। शैतान अौर कोई नहीं वरन हमारे अंदर की हीं आवाज है। अपने आप में बुराईयाँ देखो, दूसरों में नहीं। जो अपनी कमियों को, अपने अंदर के शैतान को पहचान लेता है, वही भगवान को भी जान सकता है।
World No Tobacco Day: The positive effects of quitting smoking.
| World No Tobacco Day (WNTD) is observed around the world every year on 31 May. This yearly celebration informs the public on the dangers of using tobacco, the business practices of tobacco companies, what the World Health Organization (WHO) is doing to fight the tobacco epidemic, and what people around the world can do to claim their right to health and healthy living and to protect future generations. |
दरिया पर बरसते बादल !!
दोनों ने एक दूसरे को देखा ग़ौर से,
फिर दरिया पर बरसते बादल से पूछा
दरिया ने –
मुझे मेरा दिया हीं लौटा रहे हो?
या अपने राज मेरे कानों में गुनगुना रहे हो …
क्या अपने दिल की बातें मुझे सुना रहे हो?

लॉकडाउन जेनरेशन या पीढ़ी Lockdown generation
Lockdown generation’ of young workers will need extra help after COVID-19. Young women worst affected.
युवा श्रमिकों की लॉकडाउन पीढ़ी – एक नए अध्ययन के अनुसार, पूरे विश्व में युवा कामागारों, अौर नौकरी करने वालों पर COVID -19 का बेहद खराब असर पङा है। पाया गया है कि युवा महिलाएँ ज्यादा प्रभावित हुई हैं। छह में से एक से अधिक युवाओं ने महामारी की शुरुआत के बाद से काम करना बंद कर दिया है।
इस शोध के अनुसार, लॉकडाउन पीढ़ी को अतिरिक्त मदद की आवश्यकता होगी।
अगर उनकी स्थिति में सुधार के लिए तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। तब इसका खामियाज़ा दशकों तक झेलना पङ सकता है। यह पोस्ट-कोविङ अर्थव्यवस्था को भी बुरी तरह से प्रभावित करेगा।




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