
चोट से टूटे दिल से,
दिमाग़ ने पूछा –
तुम ठीक हो ना?
तुम्हें बुरा नहीं,
ज़्यादा भला होने की
मिली है सज़ा।
ऐसे लोगों की
दुनिया लेती है मज़ा।
पेश नहीं आते दिल से,
दिमाग़ वालों से।
प्यार करो अपने आप से,
मुझ से।
ज़िंदगी सँवर जाएगी।

चोट से टूटे दिल से,
दिमाग़ ने पूछा –
तुम ठीक हो ना?
तुम्हें बुरा नहीं,
ज़्यादा भला होने की
मिली है सज़ा।
ऐसे लोगों की
दुनिया लेती है मज़ा।
पेश नहीं आते दिल से,
दिमाग़ वालों से।
प्यार करो अपने आप से,
मुझ से।
ज़िंदगी सँवर जाएगी।

Thanks a lot all my WordPress friends for being a part of my writing journey! 😊💕

वह मुकम्मल जहाँ नहीं,
किसी के लिए।
जहाँ हँसी से ज़्यादा
आँसू हों।
खिलखिलाहटों से ज़्यादा
दर्द हो।
सुकून से ज़्यादा
ठोकरें हो।

बाती की लौ भभक
कर लहराई।
बेचैन चराग ने पूछा –
क्या फिर हवायें सता रहीं हैं?
लौ बोली जलते चराग से –
हर बार हवाओं
पर ना शक करो।
मैं तप कर रौशनी
बाँटते-बाँटते ख़ाक
हो गईं हूँ।
अब तो सो जाने दे मुझे।

Though nothing can
bring back the hour
Of splendor in the grass, of glory in the flower;
We will grieve not, rather find Strength in what remains behind; In the primal sympathy Which having been must ever be…
WORDS WORTH
By William Wordsworth

इनायत
अँधेरे पल हो या उजाले,
ज़िंदगी की सारी लड़ाईयाँ
हम ने तुम्हारे भरोसे लड़ी,
तुम्हारी रज़ा और
इनायत के साये में।
ना किया तुमने
कभी कोई वादा,
पर दर्मियान हमारे-तुम्हारे
भरोसे का वो रिश्ता है
कि तुमने कभी
निराश नहीं किया।

मंज़िल
यक़ीं करो अपने आप पर।
और नज़र रखो मंज़िल पर।
इस दुनिया में इतना
है टोका-टोकी।
ग़र लोगों की बातें
सुनते रहे,
मंज़िल तक नहीं
पहुँच पाएँगे कभी।

दे कर चुभन और
हाल पूछते हैं।
ना मिलने पर
सवाल पूछतें हैं।
कुरेदतें हैं,
ज़ख्मों को
मलहम के बहाने।
उन लोगों का
क्या किया जाए?

शीशमहल
कौन खोजता हैं दूसरों में
कमियाँ हीं कमियाँ ?
उसमें अपने आप को
ढूँढने वाले।
यह शीश महल
देखने जैसा है।
जिधर देखो अपना हीं
अक्स और परछाइयाँ
देख ख़ुश हो
लेते है ये लोग।

कद्र
किसी के लिए सब कुछ
दिल से करो ।
फिर भी तुम्हारे वजूद
का मोल ना हो।
कद्र न हो तुम्हारी।
तब दूरियाँ हीं
समझदारी है।
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