इश्क़

कुछ मोहब्बतें

जलतीं-जलातीं हैं।

कुछ अधुरी रह जाती हैं।

कुछ मोहब्बतें अपने

अंदर लौ जलातीं हैं।

जैसे इश्क़ हो

पतंग़े का चराग़ से,

राधा का कृष्ण से

या मीरा का कान्हा से।

12 thoughts on “इश्क़

  1. जीवन चाहता है
    कि हम जीवन देते हैं
    इनाम के बिना
    नम्र सेवा में
    हम इसमें
    उपभोग करना

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