ज़िंदगी के रंग -194

कभी कभी ज़िंदगी से

थकान सी होने लगती है.

हारी हुई बाज़ियों के बीच,

तभी एक किरण चमकती है,

आशाओं… उम्मीदों….

और ख़ुशियों की.

जैसे बरसते काले बादलों के बीच

चमकती है सूरज की किरण .

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