ज़िंदगी को नहीं फ़िक्र, तुम कौन हो?
वह सब को एक जैसे सबक़ देती है।
कि ज़िंदगी की ख्वाहिशों को पूरा
करने के लिए मूल्य चुकाना पड़ता है।

ज़िंदगी को नहीं फ़िक्र, तुम कौन हो?
वह सब को एक जैसे सबक़ देती है।
कि ज़िंदगी की ख्वाहिशों को पूरा
करने के लिए मूल्य चुकाना पड़ता है।

तन्हाईयाँ ख़्वाबों तक जाने की राहें बनातीं हैं।
हौसला हो एकांत से इश्क़ करने का।
तो तन्हाईयाँ मंज़िल पाना आसान बनातीं हैं।

मुझे हमेशा लगा
– यह तो मैं हूँ।
गौर किया,
तब पाया।
यह तो तुम हो,
मुझ में समाए।

सुकून भरा दिल और रूह
चंद बूँदे बरसे आसमान से।
खुला आकाश फुसफुसाया कानों में।
चैन पाने के लिए चंद क़तरे हम भी बरस जाने देते हैं,
कालिमा भरे नभ से, स्वच्छ नभ पाने के लिए।
आज़ाद छोड़ दे एहसासों औ दर्द को
बरस कर बह जाने के लिए।
ग़र पाना है सुकून भरा दिल और रूह।

Psychological fact –
Normal crying is emotional cathartic. It does have a soothing and relaxing effect. When we cry, our heart rate and breathing slow down a little and we start to calm down. We might even experience a mood boost after a good cry. Crying is useful for helping people release and express their suppressed or repressed emotions.
(Dr J Chan, a clinical psychologist at the Hong Kong Psychological Counselling Centre in Mong Kok)
चाँद, कई बार तुम आइने से लगते हो।
जिसमें अक्स झलक रहा हो अपना।
तुम्हारी तरह हीं अकेले,
अधूरे-पूरे और सुख-दुःख के सफ़र में,
दिल में कई राज़ छुपाए,
अँधेरे में दमकते,
अपने पूरे होने के आस में रौशन हैं।



कहते हैं ग़र अफ़सानों को अंजाम तक मौन रख कर ले जाये तो कोशिशें कामयाब होतीं है। ना राज़ खोलें ज़बान से, ना नज़रों से। तो नज़रें नहीं लगेंगी। लक्ष्य पाना है, तो बातों को अपनों से और ग़ैरों से राज़ बना सीने में छुपा रखना हीं मुनासिब है।

अपने दर्द औ तकलीफ़ को बहाना ना बनाओ,
दूसरों के ठेस पहुँचाने का।
वरना ना तुम्हारा चोट ठीक होगा ना दर्द जाएगा।
यह अपने घाव को कुरेदते रहने जैसा है।

Though nothing can
bring back the hour
Of splendor in the grass, of glory in the flower;
We will grieve not, rather find Strength in what remains behind; In the primal sympathy Which having been must ever be…
WORDS WORTH
By William Wordsworth

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