कभी-कभी कुछ रिश्तों को
एक तरफ़ा चलाने को कोशिशें रोक दें,
तब वे रिश्ते मरने लगें।
कभी-कभी देखा है ,
कुछ बेज़ान रिश्ते ढोने से वे जी नहीं जाते।
दरअसल वे रिश्ते होते हीं नहीं।
ऐसे एक तरफ़ा रिश्ते को छोड़
आगे बढ़ जाना समझदारी है।

TopicByYourQuote
कभी-कभी कुछ रिश्तों को
एक तरफ़ा चलाने को कोशिशें रोक दें,
तब वे रिश्ते मरने लगें।
कभी-कभी देखा है ,
कुछ बेज़ान रिश्ते ढोने से वे जी नहीं जाते।
दरअसल वे रिश्ते होते हीं नहीं।
ऐसे एक तरफ़ा रिश्ते को छोड़
आगे बढ़ जाना समझदारी है।

TopicByYourQuote

क़तरे आँसुओं के
दर्द , ग़ुस्सा आँसू पीते जाने से
रूह की प्यास मिटती नहीं है।
दर्द नासूर बन टीसने लगता है।
फिर भी अक्सर नज़र आतें हैं
दर्द छुपाते नक़ली मुस्कान भरे चेहरे,
मुस्कुराती आखें और आँखों में छुपे
झिलमिलाते क़तरे आँसुओं के।
Psychological fact – Denial is best known defense mechanisms, used when people are unable to face reality or admit an obvious truth to protect their ego.

शक्ति मद नींद में डूबे अंग्रेज सरकार को,
जगाने की कोशिश में फेंका संदेशमय पर्चे के साथ बम –
“मानव को मारा जा सकता है, उसके विचार को नहीं।
बड़े से बड़े साम्राज्यों का पतन हो जाता है
लेकिन विचार हमेशा जीवित रहते हैं।”
सुप्त, बधिर, क्रूर आंग्ल शासकों को जगाने की कोशिश में
23 मार्च, क्रांतिकारी वीर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव
सो गए चिर निंद्रा, देश की आज़ादी के लिए।

चारो ओर छाया रात का रहस्यमय अंधेरा,
दिन के कोलाहल से व्यथित निशा का सन्नाटा,
गवाह है अपने को जलाते चराग़ों के सफ़र का।
कभी ये रातें बुला ले जाती है नींद के आग़ोश में ख़्वाबों के नगर।
कभी ले जातीं है शब-ए-विसाल और
कभी दर्द भरी जुदाई की यादों में ।
हर रात की अपनी दास्ताँ और अफ़साने होतें है,
और कहने वाले कह देतें हैं- रात गई बात गई !
शब-ए-विसाल – मिलन की रातें/ the night of union

#TopicByYourQuote
दुनिया है बड़ी अजीब।
तोड़ते हैं लोग दिल और वादे।
पकड़ते हैं बातों को।
तोड़ते-मरोडते हैं बात बनाने के लिए बातों को।
फिर भी चाहतें हैं,
लोग उनकी बातों पर यक़ीन करें।
उनके हाथों तोड़े अपने दिल में उन्हें जगह दें।
Psychological Fact – The manipulator deliberately creates an imbalance of power and exploits the victim to serve his or her agenda.
Symptoms of manipulators – lying. Excuse-making. Being two-faced. Blaming the victim for causing their own victimization. Deformation of the truth.

जब अपनी चाँदी सी सुकून भरी चाँदनी भर देता हैं चाँद,
खुली खिड़कियों से कमरे में।
तब हम अक्सर गुफ़्तगू करते हैं चाँद और सितारों से।
वातायन से झाँकता चाँद हँस कर कहता है,
दूरियाँ-नज़दीकियाँ तो मन की बातें है।
कई बार लोग पास हो कर भी पास नहीं होते।
रिश्तों में बस शीतलता, सुकून और शांति होनी चाहिए।
देखो मुझे, जीवन में घटते-बढ़ते तो हम सब रहते हैं।
मुस्कुरा कर सितारों ने कहा हैं-
याद है क्या तुम्हें?
हमें टूटते देख दुनिया अपनी तमन्नाएँ औ ख़्वाहिशें
पूरी होने की दुआएँ माँगती है, हमारा टूटना नहीं देखती।
फिर भी हम टिमटिमाते-खिलखिलाते रहते हैं।
कभी ना कभी सभी टूटते औ आधे-अधूरे होते रहतें हैं।
बस टिमटिमाते रहो, रौशनी और ख़ुशियाँ बाँटते रहो।
क्योंकि सभी मुस्कुराहटों और रौशनी की खोज़ में है।


कुछ पलों के लिए लगा,
भटका दिया ज़िंदगी ने मुझे ।
जब दिल की गहराईयों में झाँक
तब समझ आया।
ज़िंदगी ने नहीं,
जिनसे राहें पूछी थीं,
उन लोगों ने भटका दिया था।
ज़िंदगी ने तो भटके राहों पर,
अँधेरे पलों में भी
कई सबक़ सिखा दिये।
वापस सही राहों पर ला दिया।
#YourQuote topic
मेरे वजूद का एक हिस्सा
कहीं पीछे छूट गया है,
बिना क़र्ज़ अदा किए
छोड़ जानेवाले के साथ।
अपने हिस्से की जिम्मदारियों
के क़र्ज़ उतारते उतारते
ज़िंदगी में आगे बढ़ गई हूँ ।
मगर ज़िंदगी का ब्याज
ख़त्म होता नहीं।

Topic by -YourQuote
जिन्हें अपना पता मालूम नहीं,
वो दूसरों को राहें क्या बताएँगे?
बस थोड़ा सुकून और शीतलता
देने की कोशिश कर सकते है।
ताज़गी भरी स्वच्छंद, मनमौजी,
बहती-झूमती बयार ने कहा।

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