रात बुला ले जाती है!

चारो ओर छाया रात का रहस्यमय अंधेरा,

दिन के कोलाहल से व्यथित निशा का सन्नाटा,

गवाह है अपने को जलाते चराग़ों के सफ़र का।

कभी ये रातें बुला ले जाती है नींद के आग़ोश में ख़्वाबों के नगर।

कभी ले जातीं है शब-ए-विसाल और

कभी दर्द भरी जुदाई की यादों में ।

हर रात की अपनी दास्ताँ और अफ़साने होतें है,

और कहने वाले कह देतें हैं- रात गई बात गई !

शब-ए-विसाल – मिलन की रातें/ the night of union

#TopicByYourQuote

दुनिया

दुनिया है बड़ी अजीब।

तोड़ते हैं लोग दिल और वादे।

पकड़ते हैं बातों को।

तोड़ते-मरोडते हैं बात बनाने के लिए बातों को।

फिर भी चाहतें हैं,

लोग उनकी बातों पर यक़ीन करें।

उनके हाथों तोड़े अपने दिल में उन्हें जगह दें।

Psychological Fact – The manipulator deliberately creates an imbalance of power and exploits the victim to serve his or her agenda.

Symptoms of manipulators – lying. Excuse-making. Being two-faced. Blaming the victim for causing their own victimization. Deformation of the truth.

चाँद और सितारे

जब अपनी चाँदी सी सुकून भरी चाँदनी भर देता हैं चाँद,

खुली खिड़कियों से कमरे में।

तब हम अक्सर गुफ़्तगू करते हैं चाँद और सितारों से।

वातायन से झाँकता चाँद हँस कर कहता है,

दूरियाँ-नज़दीकियाँ तो मन की बातें है।

कई बार लोग पास हो कर भी पास नहीं होते।

रिश्तों में बस शीतलता, सुकून और शांति होनी चाहिए।

देखो मुझे, जीवन में घटते-बढ़ते तो हम सब रहते हैं।

मुस्कुरा कर सितारों ने कहा हैं-

याद है क्या तुम्हें?

हमें टूटते देख दुनिया अपनी तमन्नाएँ औ ख़्वाहिशें

पूरी होने की दुआएँ माँगती है, हमारा टूटना नहीं देखती।

फिर भी हम टिमटिमाते-खिलखिलाते रहते हैं।

कभी ना कभी सभी टूटते औ आधे-अधूरे होते रहतें हैं।

बस टिमटिमाते रहो, रौशनी और ख़ुशियाँ बाँटते रहो।

क्योंकि सभी मुस्कुराहटों और रौशनी की खोज़ में है।

भटका दिया ज़िंदगी ने मुझे

कुछ पलों के लिए लगा,

भटका दिया ज़िंदगी ने मुझे ।

जब दिल की गहराईयों में झाँक

तब समझ आया।

ज़िंदगी ने नहीं,

जिनसे राहें पूछी थीं,

उन लोगों ने भटका दिया था।

ज़िंदगी ने तो भटके राहों पर,

अँधेरे पलों में भी

कई सबक़ सिखा दिये।

वापस सही राहों पर ला दिया।

#YourQuote topic

वजूद

मेरे वजूद का एक हिस्सा

कहीं पीछे छूट गया है,

बिना क़र्ज़ अदा किए

छोड़ जानेवाले के साथ।

अपने हिस्से की जिम्मदारियों

के क़र्ज़ उतारते उतारते

ज़िंदगी में आगे बढ़ गई हूँ ।

मगर ज़िंदगी का ब्याज

ख़त्म होता नहीं।

Topic by -YourQuote

मनमौजी बयार

जिन्हें अपना पता मालूम नहीं,

वो दूसरों को राहें क्या बताएँगे?

बस थोड़ा सुकून और शीतलता

देने की कोशिश कर सकते है।

ताज़गी भरी स्वच्छंद, मनमौजी,

बहती-झूमती बयार ने कहा।

जंग

जिन्हें जंग चाहिए, उन्हें हासिल होता है,

विनाश देख ख़ुशियाँ और अपने अहं की शांति ।

औरों को हासिल होता है दर्द और रक्तपात।

हम सबों को एक युद्ध…. लङाई… जंग लड़नी होगी ,

सभी लङाईयों को खत्म करने के लिये।

शांती लाने के लिये।

This topic is given by YourQuote.

गुलाब को कमल क्यों बनना?

जब लोग आपको तराशने और अपने साँचे में ढालने लगे।

आपको काट-छाँट औ कतर कर अपने पसंद लायक़ बनाने लगें।

तब बेहतर है संभल जाना।

हर फ़ूल अपनी सुगंध और ख़ूबसूरती ले कर आया है।

क्या कभी गुलाब को कमल बनाने का ख़्याल भी मन में आया है?

फिर अपने को खो कर किसी जैसा,

किसी के पसंद सा क्यों बनाना?

सच तो ये है कि अपने को गवाँ कर नहीं पाया जा सकता किसी को।

गीला मन

आँसू बहाते नयन और गीला मन,
गिलाओं को बह जाने देता है।
आँसुओं से धुल दिल का दर्द

हलका हो जाता है।
ये पानी के क़तरे नहीं,

जज़्बात के आईने होतें हैं।
अश्क़ और जज़्बात दबाए रखना,
सैलाब रोकना है।
बहा दिया,
तो ज़िंदगी फिर से

ख़ूबसूरत नज़र आने लगती है।

लावा

धरती के दिल का दर्द जब फूट निकलता है। उबलते दर्द से पत्थर भी मोम सा पिघलता है। माणिक-पोखराज जैसे ख़ूबसूरत रंग लिए, आतशीं-लावा दमकता है। पास जाओ तो गरमाहट और आग बताती है, ज़मीं का क़तरा-क़तरा दर्द से लरज़ता है। दर्द भरा हर वजूद ऐसे हीं सुलगता है।