एक अरसा हो गया ख़ुद से मिले…

हमें मालूम है तुम्हें,

एक अरसा हो गया है ख़ुद से मिले।

दुआ देतें हैं, तुम्हें तुम जैसा कोई मिले।

उस आईने में,

अक्स से नज़रें मिला सको तो देखना

तुम्हें अपना व्यवहार

अपना किरदार नज़र आएगा।

#TopicByYourQuote

ये भी याद है !

मुलाक़ात न होने पाई थी

वक्त-ए- रुख़्सत ।

पर बंद आँखों से देखा था,

एक गहरी सी साँस और

तिरी गीली आँखों का झुक जाना,

क़तरे अश्क़ो का छलक जाना,

सूखे लबों का थरथराना।

तेरे हाथों का यूँ उठ जाना याद है

जैसे डूबने वाला हो कोई।

पर कहा नहीं तूने अलविदा

ये भी याद है।

रेशम सी नाज़ुक

हर रिश्ते के दर्मियान होती है एक डोर।
रेशम सी नाज़ुक विश्वास और भरोसे से बंधी।
राज़, रहस्य, बेवफ़ाई और झूठ आयें बीच में,
तो टूट कर बिखर जाती है।
ग़र बनाने हो या निभाने हों रिश्ते,
एक दूसरे को सब बताओ, सच बताओ।
ग़र सच सहने का ताब ना हो तो मुरझाने दो इन्हें।
रूह की आईनों में देखो, तुम्हें रिश्तों में क्या चाहिए।
वही दो दूसरों को।
वरना ज़िंदगी क़ैद बन जाएगी।

Happy Psychology! Positive Psychology! – Honesty Can Make or Break a Relationship. When you know you can totally trust your mate, it strengthens your love.

हौसला

रफ़ू रिश्ते

ग़र किसी ने दूरियाँ बना ली,

गिला करने से पहले,

झाँक कर देखो गिरेबान में अपने।

कितनी बार रिश्तों के

फटे गिरेबाँ रफ़ूगर करे रफ़ू?

थक कर समझ गया,

बेहतर है अपनी

राह-ए-मंज़िल पर बढ़ जाना।

बसंती बयार

कभी-कभी कुछ रिश्ते

कभी-कभी कुछ रिश्तों को

एक तरफ़ा चलाने को कोशिशें रोक दें,

तब वे रिश्ते मरने लगें।

कभी-कभी देखा है ,

कुछ बेज़ान रिश्ते ढोने से वे जी नहीं जाते।

दरअसल वे रिश्ते होते हीं नहीं।

ऐसे एक तरफ़ा रिश्ते को छोड़

आगे बढ़ जाना समझदारी है।

TopicByYourQuote

क़तरे आँसुओं के

क़तरे आँसुओं के

दर्द , ग़ुस्सा आँसू पीते जाने से

रूह की प्यास मिटती नहीं है।

दर्द नासूर बन टीसने लगता है।

फिर भी अक्सर नज़र आतें हैं

दर्द छुपाते नक़ली मुस्कान भरे चेहरे,

मुस्कुराती आखें और आँखों में छुपे

झिलमिलाते क़तरे आँसुओं के।

Psychological fact – Denial is best known defense mechanisms, used when people are unable to face reality or admit an obvious truth to protect their ego.

बलिदान दिवस, शहीद दिवस, 23 March

शक्ति मद नींद में डूबे अंग्रेज सरकार को,

जगाने की कोशिश में फेंका संदेशमय पर्चे के साथ बम –

“मानव को मारा जा सकता है, उसके विचार को नहीं।

बड़े से बड़े साम्राज्यों का पतन हो जाता है

लेकिन विचार हमेशा जीवित रहते हैं।”

सुप्त, बधिर, क्रूर आंग्ल शासकों को जगाने की कोशिश में

23 मार्च, क्रांतिकारी वीर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव

सो गए चिर निंद्रा, देश की आज़ादी के लिए।

ज़िंदगी के रंग -236