
सुकून



ऐसा होता तो वैसा होता।
वैसा होता तो अच्छा होता।
अगर मन की बातें होतीं
कैसे मालूम कैसा होता?
कौन जाने क्या होता?
शायद यही सबसे अच्छा है?
अपने मन की बातें जाने दो।
बातें जैसी है वैसे स्वीकार कर लो,
ग़र ख़ुशियाँ और सुकून चाहिए।
Do not worry that your life is turning
upside down. How do you know the
side you are used to is better than
the one to come?
~ Rumi
लोग क्या कहेंगे?
वही कहतें हैं लोग अक्सर,
जो है नज़रिया उनका।
क्या है ज़रूरी, लोगों की राय?
रूह में दहशत? या ख़ुशियाँ औ सुकून?
सुने सब की, गौर करो, पर दिल पर ना लो।
खोना नहीं ख़ुशियों के पल,
ज़िंदगी रखो ख़ुशगवार।
Positive Psychology- “Once you start
making the effort to “wake-yourself up”
that is, be more mindful in your। activities,
you suddenly start appreciating life a lot more
– Robert Biswas-Diener

ग़र ख़ुशियाँ और सुकून चाहिए,
तब अपने-आप से ना लड़ो।
ना अपने-आप से हारो।
प्यार करो अपने आप से,
ईमानदार रहो, सच बोलो।
याद रखो,
तुम्हारे सब से अपने बस तुम ही हो।
बाक़ी सब तो परखते रहते हैं।
जैसे सोना परखा जाता है
कसौटी पर घस-घस कर।
जिससे तुम कुछ पाओगे नहीं।

खामोशियाँ सुकून बन जाए।
तनहाइयाँ भाने लगे।
परवाह न रहे लोगों की,
उनकी बातों की।
मायने ईश्वर साथ है,
सम्भालता दुनिया की ठोकरों से,
राहें दिखाता-सिखाता।
तब एकांत बन जाता है नियामत,
देता है कई प्रश्नों के जवाब
और सिखाता है सलीके से
ख़ुशगवार ज़िंदगी जीना।

कुछ लोग दिल में होते हैं ज़िंदगी में नहीं।
कुछ ज़िंदगी में होते है दिल में नहीं।
जो अपने रूह और दिल में जगह दें।
उन्हें हीं ज़िंदगी,
रूह और दिल का हिस्सा बनायें,
चाहे वे दूर हों या पास,
ग़र ना हो चाहत टूटने-बिखरने की।
सिर्फ़ पास और साथ के लिए
साथ ना निभाएँ।
रिश्ते अपनेपन के लिए होतें हैं,
ख़ामियाज़ा भरने के लिए नहीं।

ग़र अपना साथ ख़ुशियाँ देने लगे,
तब ख़ुद को जीतने की राहों पर हैं।
ग़र दूसरों से प्यार पा ख़ुश रहने की
ख्वाहिशें कम होने लगे,
तब ख़ुद से प्यार करने की राहों पर हैं।
ग़र दर्द भरे पलों में मुस्कुरा रहे हैं,
तब निर्भय होने की राहों पर है।
ग़र एकांत ख़ुशनुमा लगने लगा है,
तब अध्यात्म की राहों पर हैं।
यह जोखिम भरा शग़ल मीठा सा नशा है।
पर तय है, इसमें सुकून अनलिमिटेड है।

हम सब जग में लोगों से रिश्ते बनाते हैं।
कभी अपने साथ प्रेम और इश्क़ भरा
रिश्ता बना कर देखो।
लोगों को अपने जीवन के
दायरे और सीमा बता कर देखो।
ग़र मन का सुकून चाहिए,
दूसरों के बदले खुद के लिए
जीवन जी कर देखो।
कई उलझनें ख़ुद-ब-ख़ुद सुलझने लगेंगी।

तन थके तो आराम चाहिए।
मन थके तो सुकून चाहिए।
“जो होगा अच्छा होगा”
मन के सुकून और शांति के लिए,
यह विश्वास क़ायम रखना है ज़रूरी।
कोशिश से बना सकते है यह यक़ीन।
गीता में छुपा है यह जीवन सार –
जो हुआ अच्छा हुआ।
जो हो रहा है वह अच्छा है।
जो होगा वह भी अच्छा होगा।

सुकून भरा दिल और रूह
चंद बूँदे बरसे आसमान से।
खुला आकाश फुसफुसाया कानों में।
चैन पाने के लिए चंद क़तरे हम भी बरस जाने देते हैं,
कालिमा भरे नभ से, स्वच्छ नभ पाने के लिए।
आज़ाद छोड़ दे एहसासों औ दर्द को
बरस कर बह जाने के लिए।
ग़र पाना है सुकून भरा दिल और रूह।

Psychological fact –
Normal crying is emotional cathartic. It does have a soothing and relaxing effect. When we cry, our heart rate and breathing slow down a little and we start to calm down. We might even experience a mood boost after a good cry. Crying is useful for helping people release and express their suppressed or repressed emotions.
(Dr J Chan, a clinical psychologist at the Hong Kong Psychological Counselling Centre in Mong Kok)
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