ठहराव

तकरार औ इकरार हो,

शिकवे और गिले भी।

पर ठहराव हो, अपनापन,

भरोसा और सम्मान हो,

ग़र निभाने हैं रिश्ते।

वरना पता भी नहीं चलता।

आहिस्ता-आहिस्ता,

बिन आवाज़

बिखर जातें हैं रिश्ते,

टूटे …. शिकस्ते आईनों

की किर्चियों से।

ज़िंदगी के रंग – 225

हर दिल में कितने

ज़ख़्म होते हैं….

ना दिखने वाले।

कुछ चोट, समय के

मरहम से भर जातें हैं।

कुछ रिसने वाले

नासूर बन, रूहों तक

उतर जातें हैं।

धीरे-धीरे ज़िंदगी

सिखा देती है,

दिल में राज़ औ लबों

पर मुस्कुराहट रखना।

लफ़्ज़

लफ़्ज़ों के वजूद को समझो।

दिल में उतरने के लिए और

दिल से उतारने के लिए

कुछ बोले और अबोले लफ़्ज़

हीं काफ़ी हो

 

पहचान

लोगों के चेहरे देखते देखते ज़िंदगी कट गई।

चेहरे पहचानना अभी तक नहीं आया।

मेरी बातें सुन आईना हँसा और बोला –

मैं तो युगों-युगों से यही करता आ रहा हूँ।

पर मेरा भी यही हाल है।

मनचाहा दिखने के लिए,

लोग रोज़ नये-नये चेहरे बदलते रहते हैं।

सौ चेहरे गढ़,

कभी मुखौटे लगा, रिश्वत देते रहते हैं।

पल-पल रंग बदलते रहते हैं।

चेहरे में चेहरा ढूँढने और पहचानने की कोशिश छोड़ो।

अपने दिल की सुनो,

दूसरों को नहीं अपने आप को देखो।

सुकून

सागर के दिल पर तिरती- तैरती नावें,

याद दिलातीं हैं – बचपन की,

बारिश अौर अपने हीं लिखे पन्नों से काग़ज़ के बने नाव।

 नहीं भूले कागज़ के नाव बनाना,

पर अब ङूबे हैं  जिंदगी-ए-दरिया के तूफान-ए-भँवर में।

तब भय न था कि गल जायेगी काग़ज की कश्ती।

अब समझदार माँझी  

कश्ती को दरिया के तूफ़ाँ,लहरों से बचा

तलाशता है सुकून-ए-साहिल।

 

ख्वाब

कहानी

दरिया पर बरसते बादल !!

दोनों ने एक दूसरे को देखा ग़ौर से,

फिर दरिया पर बरसते बादल से पूछा

दरिया ने –

मुझे मेरा दिया हीं लौटा रहे हो?

या अपने राज मेरे कानों में गुनगुना रहे हो …

क्या अपने दिल की बातें मुझे सुना रहे हो?

 

जेलोटोलॉजी या हँसी का विज्ञान

क्या आप जानते हैं, हँसी का मनोविज्ञान या विज्ञान होता है। हँसी के  शरीर पर होने वाले प्रभाव को ‘जेलोटोलॉजी’ कहते हैं।

क्या आपने कभी गौर किया है, हँसी संक्रामक या इनफेक्शंस होती है। एक दूसरे को हँसते देखकर ज्यादा हँसी आती है। बच्चे सबसे अधिक हँसते हैं और महिलाएं पुरुषों से अधिक हँसती हैं। हम सभी बोलने से पहले अपने आप हँसना सीखते हैं। दिलचस्प बात है कि हँसने की भाषा नहीं होती है। हँसी खून के बहाव को बढ़ाती है। हम सब लगभग एक तरह से हँसते हैं।

मजे की बात है कि जब हम हँसते हैं, साथ में गुस्सा नहीं कर सकते । हँसी तनाव कम करती है। हँसी काफी कैलोरी भी जलाती है। हँसी एक अच्छा व्यायाम है। आजकल हँसी थेरेपी, योग और ध्यान द्वारा उपचार भी किया जाता है। डायबिटीज, रक्त प्रवाह, इम्यून सिस्टम, एंग्जायटी, तनाव कम करने, नींद, दिल के उपचार में यह फायदेमंद साबित हुआ हैं। हँसी स्वाभिक तौर पर दर्दनिवारक या पेनकिलर का काम भी करती है।

हमेशा हँसते- हँसाते रहें! खुश रहें! सुरक्षित रहें!

 

 

साथ अौर गुलाबी डूबती शाम

गुलाबी डूबती शाम.

थोड़ी गरमाहट लिए हवा में

सागर के खारेपन की ख़ुशबू.

सुनहरे पलों की ….

यादों की आती-जाती लहरें.

नीले, उफनते सागर का किनारा.

ललाट पर उभर आए नमकीन पसीने की बूँदें.

आँखों से रिस आए खारे आँसू और

चेहरे पर सर पटकती लहरों के नमकीन छींटे.

सब नमकीन क्यों?

पहले जब हम यहाँ साथ आए थे.

तब हो ऐसा नहीं लगा था .

क्या दिल ग़मगिन होने पर सब

नमकीन…..खारा सा लगता है?