कालरात्रि सा सघन अँधेरा ,
आता है जीवन में हर रोज़ .
पर
आकाश के एक एक कर
बूझते सितारे,
करते है सूरज
औ भोर की
किरणों का आगाज …..
बस याद रखना है –
हर रात की होती है
सुहानी भोर !!!
कालरात्रि सा सघन अँधेरा ,
आता है जीवन में हर रोज़ .
पर
आकाश के एक एक कर
बूझते सितारे,
करते है सूरज
औ भोर की
किरणों का आगाज …..
बस याद रखना है –
हर रात की होती है
सुहानी भोर !!!
आईने में अपने प्रतिद्वंद्वी व मित्र को देखा।
जीवन की स्पर्धा, प्रतिस्पर्धा , मुक़ाबला
किसी और से नहीं अपने आप से हो,
तब बात बराबरी की है।
वर्ना क्या पता प्रतियोगी या हम,
कौन ज्यादा सक्षम है?
जिंदगी का अंत तो वही है,
सबसे बङा शाश्वत सत्य —
जीवन अौर फिर मृत्यु…
विचार अपने-अपने हैं,
इसे हँस कर बिताअो या रो कर………
आँसू बहाना है या पद चिंह छोङ जाना है …
जीवन में अर्थ खोजते-खोजते समय निकल गया।
अर्थ समझ आया, तब जीवन निकल चुका था।
मन अौर दिल पर लगे,
हर चोट के निशान ने मुस्कुरा कर
ऊपरवाले को शुक्रिया कहा…..
जीवन के सभी सबक, पीड़ा अौर आघात
वे तमगे अौर पदक हैं,
जिन्हों ने जीना सिखाया।
जीवन के बिखरे पन्नों को समेटते – समेटते,
लगा जैसे युग बीत गये………
पर यादों के समुन्द्र से बाहर आ कर देखा,
बस कुछ हीं पल गुजरें थे।