डर

सब खो दिया।

अब क्यों डरें?

कुछ और अब

ना चाहिए।

वरना फिर डरना

सीख जाएँगें।

बाती और चराग

बाती की लौ भभक

कर लहराई।

बेचैन चराग ने पूछा –

क्या फिर हवायें सता रहीं हैं?

लौ बोली जलते चराग से –

हर बार हवाओं

पर ना शक करो।

मैं तप कर रौशनी

बाँटते-बाँटते ख़ाक

हो गईं हूँ।

अब तो सो जाने दे मुझे।

इनायत

इनायत

अँधेरे पल हो या उजाले,

ज़िंदगी की सारी लड़ाईयाँ

हम ने तुम्हारे भरोसे लड़ी,

तुम्हारी रज़ा और

इनायत के साये में।

ना किया तुमने

कभी कोई वादा,

पर दर्मियान हमारे-तुम्हारे

भरोसे का वो रिश्ता है

कि तुमने कभी

निराश नहीं किया।

कद्र

कद्र

किसी के लिए सब कुछ

दिल से करो ।

फिर भी तुम्हारे वजूद

का मोल ना हो।

कद्र न हो तुम्हारी।

तब दूरियाँ हीं

समझदारी है।

ख़्वाब

ख़्वाब और तितलियाँ

रात के आँचल में,

कई ख़्वाब रंग-बिरंगी

तितलियों से आतें हैं।

बंद आँखों में

खेल जातें हैं।

हाथ बढ़ाते,

आँखें खुलते,

कुछ अधूरी यादें

छोड़ जातें है।

जैसे तितलियों को

पकड़ने की कोशिश में,

उनके परों के कुछ

रंग अंगुलियों पर

छूट जातें हैं।

माफ़ी

कहते हैं,

अपने दिल के सुकून

के लिए लोगों को

माफ़ करना अच्छा है।

चाहे वे माफ़ी

माँगे या ना माँगे।

पर ऐसी माफ़ियों से

रिश्ते में कुछ

घटने लगता है –

शायद, विश्वास,

प्यार और अपनापन !!

असली मुस्कुराहटें

ना छुपो अपने आप से,

ना दुनिया से

अपने आप की छुपाओ।

ना ढलो अपने को

बीते कल में…..

या किसी परिभाषा में।

ना रोज़ रोज़ बदलो,

रंग बदलती

दुनिया की तरह।

वरना तुम्हारी असली

मुस्कुराहटें कहीं खो जाएगी।

दाग़दार चाँद!!

दाग़दार चाँद नहीं

किसी को कहता

अपनी ओर देखने ।

आँखें खुदबखुद

निहारतीं हैं।

उसका आकर्षण देख,

चकोर ताक़त है चाँद को।

सागर की लहरें ,

पूनम की रात के

शीतल चाँद को

छूने के लिए

हिलोरे मारती हैं।

अपने में जीवन का

गूढतम रहस्य छुपाए चाँद

घटता और बढ़ता रहता है।

क्योंकि उसे मालूम है

कि अपूर्णता के बाद हीं

पूर्णता मिलती है।

चाँद

हँस कर चाँद ने कहा –

यूँ गौर से ना देखो मुझे।

ज़िंदगी ऐसी हीं है।

सिर्फ़ मेरा हीं नहीं,

हर किसी का स्याह

समय आता है।

पर सबसे अच्छी बात है,

अपने आप को पूर्ण

करने की कोशिश

में लगे रहना !!

तुम हो ना ?

जब कभी जीवन समर से थकान होने लगती है।

तब ख्वाहिश होती है,

आँखे बंद कर  आवाज़ दे कर पूछूँ –

मेरे रथ के सारथी कृष्ण तुम साथ हो ना?

अौर आवाज़ आती है –

सच्चे दिल के भरोसे मैं नही तोड़ता

ख़्वाहिश करो ना करो। 

मैं यहीं हूँ।

डरो नहीं, अकेला नहीं छोड़ूँगा!