
ज़िंदगी की हर जंग में,
हर महाभारत में आश्वस्त हैं।
क्योंकि जीवन के
हर सैलाब में तुम्हें साथ
ले कर चल रहें हैं।
भरोसा है,
जब तुमने जंग दिया है
तो जय दिलाने सारथी
बन तुम आओगे हीं।

ज़िंदगी की हर जंग में,
हर महाभारत में आश्वस्त हैं।
क्योंकि जीवन के
हर सैलाब में तुम्हें साथ
ले कर चल रहें हैं।
भरोसा है,
जब तुमने जंग दिया है
तो जय दिलाने सारथी
बन तुम आओगे हीं।

ज़िंदगी के जंग में,
जब हम अपना सम्मान करना,
अपने लिए खड़े होना
सीखने लगते है।
तब कई लोग हम से
दूर हो जातें है।
वे साथ नहीं छोड़ते
क्योंकि वे कभी
साथ थे हीं नहीं।
बस दिखने लगती है
सब की फ़ितरत।
जो अपने हैं,
साथ खड़े मिलेंगे।

किसी और की बातों
और राय को बोझ
ना बनने दो।
सुन सब की लो।
पर सुनो अपने दिल की।

चींटियाँ हों या इंसान।
ज़िंदगी जीने की
जद्दो-जहद में,
क्या दोनों
एक सी ज़िंदगी
नहीं जी रहे?

जो उलझ गई वो है
ज़िंदगी साहब।
सब की है अपनी ज़िंदगी
अपनी राहें।
कई बार सुलझती सी,
कई बार उलझने और
उलझती सी।
ना सज्दा ना जप के
मनके राह सुझाते है।
दिल परेशान है,
ये रास्ते किधर जातें है?
अब उलझनों को
आपस में उलझने
छोड़ दिया है।
यह सोंच कर कि
उन्हें बढ़ाने से
क्या है फ़ायदा?
ज़िंदगी ना उलझी
तो क्या है मज़ा?

ख़ुशियों के खोज़ में
गुज़रती जा रही है ज़िंदगी।
कितनी गुजारी यादों में
कितनी कल्पना में ?
है क्या हिसाब?
ग़र आधी ज़िंदगी गुज़ारी
अतीत के साये में
और भविष्य की सोंच में।
फिर कैसे मिलेगी ख़ुशियाँ ?
और कहते है –
चार दिनों की है ज़िंदगी,
चार दिनों की है चाँदनी ।
Wandering mind not a happy mind ( A research result)
Harvard psychologists Matthew A. Killingsworth and Daniel T. Gilbert used a special “track your happiness” iPhone app to gather research. The results: We spend at least half our time thinking about something other than our immediate surroundings, and most of this daydreaming doesn’t make us happy.
https://news.harvard.edu/gazette/story/2010/11/wandering-mind-not-a-happy-mind/

कुछ मोहब्बतें
जलतीं-जलातीं हैं।
कुछ अधुरी रह जाती हैं।
कुछ मोहब्बतें अपने
अंदर लौ जलातीं हैं।
जैसे इश्क़ हो
पतंग़े का चराग़ से,
राधा का कृष्ण से
या मीरा का कान्हा से।

अक्सर ज़ुबान पर लगे
सयंम के पहरे स्याह पलों
में बिखर जातें है।
दिल की गहराइयों में
छुपी बातें, लबों पर
बेबाक़ी से छलक आतीं हैं।
दिल से दिल की बातें
करनी हो तो चरागों के
जश्न से बेहतर अँधेरे हैं।
मनोवैज्ञानिक तथ्य– देर रात को बात करने पर ज्यादातर लोग सच बोलते हैं, क्योंकि रात को दिमाग थका हुआ होने के कारण ज्यादा नहीं सोच पाता है।
Psychology says – Night Is The Best Time To Have A Deep Conversation With Someone, According To Experts

तकरार औ इकरार हो,
शिकवे और गिले भी।
पर ठहराव हो, अपनापन,
भरोसा और सम्मान हो,
ग़र निभाने हैं रिश्ते।
वरना पता भी नहीं चलता।
आहिस्ता-आहिस्ता,
बिन आवाज़
बिखर जातें हैं रिश्ते,
टूटे …. शिकस्ते आईनों
की किर्चियों से।

दिव्य प्रेम के जश्न,
रास में डूब,
राधा इंद्रधनुष के रंगों से
नहा कर बोली कान्हा से –
हम रंगे हैं रंग में तुम्हारे।
रंग उतारता नहीं कभी तुम्हारा ।
कृष्ण ने कहा- यह रंग नहीं उतरता,
क्योंकि
राधा ही कृष्ण हैं और
कृष्ण ही राधा हैं।

गोपाल सहस्रनाम” के 19वें श्लोक मे वर्णित है कि महादेव जी देवी पार्वती जी को बतातें है कि एक ही शक्ति के दो रूप है – राधा और माधव(श्रीकृष्ण)।यह रहस्य स्वयं श्री कृष्ण ने राधा रानी को भी बताया। अर्थात राधा ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राधा हैं।
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