
अपने दर्द औ तकलीफ़ को बहाना ना बनाओ,
दूसरों के ठेस पहुँचाने का।
वरना ना तुम्हारा चोट ठीक होगा ना दर्द जाएगा।
यह अपने घाव को कुरेदते रहने जैसा है।

अपने दर्द औ तकलीफ़ को बहाना ना बनाओ,
दूसरों के ठेस पहुँचाने का।
वरना ना तुम्हारा चोट ठीक होगा ना दर्द जाएगा।
यह अपने घाव को कुरेदते रहने जैसा है।


कुछ लड़ाई-झगड़े
मोहब्बत भरें होतें है।
ग़र नाराज़गी में मीठास,
ग़ुस्से में प्यार,
लहजे में अपनापा हो।
तो रिश्तों की ख़ुशबू
फैलती रहती है।

रिश्तों के अहमियत
रिश्तों के अहमियत
को ना समझाने वाले
हल्की सी चोट से भी
तिलमिला उठतें है।
फिर क्यों दूसरों
पर चोट करते है?
किसी के मौन को
कमजोरी समझ कर?

अपनी ख़ुद्दारी और
आत्मसम्मान पर नाज़ करो।
झिझक नहीं।
अपने वजूद का सम्मान
ख़ुद हम नहीं करेंगे,
तब दूसरों से इज़्ज़त
पाएँगें कैसे?
अपने अहमियत को
ख़ूबसूरती से सम्भालो
तभी ज़माना अहमियत देगा।

सागर की लहरों
की तरह समय
की लहरों के साथ
हम भी उठते-गिरते
रहतें है।
समय की लहरें
जब हमारा हौसला
ऊपर ले जाये,
तब समय होता है
ऊपर उठने का।

ज़िंदगी के महाभारत में
कई चेहरे आए गए।
देखी कितनों की फ़ितरतें
नक़ाबों में छिपी।
जीवन जयकाव्य में
सारथी बन मिलते रहे
कई कृष्ण से।
हम दुआओं में
याद रखते हैं
उन्हें संजीदगी से।

फ़िक्र में डूबे हुए क्यों हैं हम?
अपने वजूद की अहमियत छोड़?
फ़िक्र में डूबे दिलो-दिमाग़
और भटकते ख़्वाब
सुकून कैसे पहुँचाएगें?
क्यों गँवानी आधी ज़िंदगी
फ़िक्र के अंधेरे में?
जहाँ ना पता चले
रौशनी और बहार
कब आए कब गये?
Psychological fact
Overthinking is caused by a single emotion: fear. When you focus on all the negative things that might happen,

दर्द की कायनात और
हिसाब भी कुछ अजीब है।
क़र्ज़ की तरह बढ़ता है।
ना तरकीब किश्तों की,
ना सूद-ब्याज का हिसाब।
ना ठहरता है
ना गुजरता है।
हँस कर छलो तो दर्द बढ़ता है।
जितना भागो, पकड़ता है।
दर्द कहाँ ले जाता है?
यह तय है ज़िंदगी
की राहें और लोगों
को बदलता है।

स्वाभिमान अच्छा है
ग़ुरूर नहीं।
कितने हिचक के बाद
माँगते हैं लोग मदद,
अपनी ख़ुद्दारी दरकिनार कर।
मदद ना करो तो है अच्छा,
मदद कर याद दिलाने से।
स्वाभिमान अच्छा है,
ग़ुरूर दिखाने से।
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