ख़्वाबों की दुनिया World Dream Day Sep 25th

नींद और ख़्वाबों की दुनिया

है तिलस्म सी रहस्यों भरी।

झिलमिलाते आधे-अधूरे-पूरे ख़्वाब,

सिर्फ़ स्याह रातों की नींद में नहीं,

जागती आँखों में भी रंग हैं भरते।

ज़िंदगी की दौड़ ख़्वाब और

उसकी ताबीर की है कहानी।

उन्हें बुनने-ख़रीदने-बेचने में

बीत जाती है ज़िंदगानी।

The World Dream Day is a strong reminder of our ability to recognize our strength and make positive change in our lives and in the world. The theme for celebrating World Dream Day 2022 will be “The Higher Dream”.

रहमतों की बारिश होगी

अलफ़ाज़ बेमानी

चटख़ कर बिना शोर टूटते हैं दिल।

यक़ीन और विश्वास बेआवाज़ टूटते है।

तय है, खामोशी में भी है शोर।

ग़र सुन सके, तो हैं अलफ़ाज़ बेमानी।

कहने वाले कहते हैं –

खामोशी होती है बेआवाज़ …. शांत।

खामोशी की है अपनी धुन

सुन सके तो सुन।

फीकी चाय (National Chai Day September 21)

अमन और शांति (The International Day of Peace 21 September)

कुछ आवाज़ें दिल-औ-दिमाग़ को

हैं देतीं शांति और सुकून,

जैसे दूर मंदिरों में टुनटुनाती घंटियाँ

या कहीं बज रहा हो शांत, धीर-गंभीर शंख।

लहजा मानो, हलकी से आ रही हो

ख़ुश्बू या आरती की आवाज़ें।

जैसे ये कहतीं हैं गले लगा लो,

मीठी बोली की बहती कलकल-छलछल

चंचल बहते पानी को।

अमन और शांति की बहा दो निर्झर।

The International Day of Peace (or World Peace Day) celebrated annually on September 21 is devoted to strengthening the ideals of peace, both within and among all nations and peoples.

दर्द और ख़ुशियाँ

दर्द हो या ख़ुशियाँ,

सुनाने-बताने के कई होते हैं तरीक़े।

लफ़्ज़ों….शब्दों में बयाँ करते हैं,

जब मिल जाए सुनने वाले।

कभी काग़ज़ों पर बयाँ करते है,

जब ना मिले सुनने वाले।

संगीत में ढाल देते हैं,

जब मिल जाए सुरों को महसूस करने वाले।

वरना दर्द महसूस कर और चेहरे पढ़

समझने वाले रहे कहाँ ज़माने में?

इतना तो मेरा हक़ बनता था!

मालूम है कि ज़िंदगी है एक रंगमंच

और हम सब किरदार।

पर कौन है शेष रह गए कई अनुत्तरित

सवालों के जवाब का ज़िम्मेदार ?

सब जाएँगें ख़ाली कर बस्ती एक दिन।

पर ऐसे बिन बताए जाता है कौन?

बरहम….. आक्रोश, नाराज़गी जाती नहीं।

ज़वाब मिले, इतना तो मेरा हक़ बनता था।

दोस्ती

बोतल से प्यार कर

महफ़ूज़ रहती है सूरा।

शराबी से आशिक़ी कर,

लगे नशेमन का कलंक।

हिना डाल पर हरी,

पाषाण की दोस्ती से बदल जाए रंग।

कमल का प्यार पानी संग

खिल जाए उसका रूप रंग।

लोहा का प्यार पानी से।

टूटे खा कर जंग।

कुछ लगाव अज़ीम रिश्ते हैं बनाते।

कुछ दोस्ती लगाते है कलंक।

आस

ग़र किसी ने दिल और आत्मसम्मान है तोड़ा।

तब अपने आप से ना भागो ।

लोगों के सामने कुछ ना साबित करो।

खुद को समझो, खुद को प्यार करो।

अपने आख़री और सबसे करीबी आस हम हैं।

बस याद रखना है – विषैले रिश्तों से दूरी है ज़रूरी।

Human Psychology-

A trauma bond is a toxic connection

between an abuser and the abused

person. To overcome it Love and

Prioritising yourself , Give yourself time

to heal and Reconnect with yourself.

ज़िंदगी की जंग (World Suicide Prevention Day observed on 10th September)

इससे तो अच्छा पाषाण युग रहा होगा।

जब जंग भूख व जीवन के लिए होता होगा।

जब अस्मत के जिम्मेदार वस्त्र नहीं होते होंगे।

ग्लैमर का नापतौल कपड़ों से नहीं होता होगा।

कपड़ों पर छींटाकशी की सियासत नहीं होती होगी।

काश जंग देश के किसी गम्भीर मुद्दे पर होता।

“सादा जीवन उच्च विचार” के ज्ञान पर होता।

विचार होता, लोग ज़िंदगी की जंग हार क्यों जातें हैं?

News – BJP still hanging in T-shirts and

khaki shorts: Bhupesh Baghel retorts

on ‘Rs 41k t-shirt’ jibe on Rahul Gandhi

World Suicide Prevention Day observed on 10th September.