
लड़ाई जारी है



ये ज़िंदगी की धुआँ धुआँ हैं आहें।
दुरूह धोखे औ गर्द भरी राहें।
मसला तो यह है कि अपने हीं
मसलते हैं अपनों के दिलों को।
इतिहास भी देता है गवाहियाँ।
लाख कोशिशों के बाद कृष्ण भी हारे।
चाहे रिश्ते लाख निबाहें,
बदली हो जब अपनों की निगाहें।
एक जंग अपनों से…
रोक नहीं सके सारे।
TopicByYourQuote
इससे तो अच्छा पाषाण युग रहा होगा।
जब जंग भूख व जीवन के लिए होता होगा।
जब अस्मत के जिम्मेदार वस्त्र नहीं होते होंगे।
ग्लैमर का नापतौल कपड़ों से नहीं होता होगा।
कपड़ों पर छींटाकशी की सियासत नहीं होती होगी।
काश जंग देश के किसी गम्भीर मुद्दे पर होता।
“सादा जीवन उच्च विचार” के ज्ञान पर होता।
विचार होता, लोग ज़िंदगी की जंग हार क्यों जातें हैं?
News – BJP still hanging in T-shirts and
khaki shorts: Bhupesh Baghel retorts
on ‘Rs 41k t-shirt’ jibe on Rahul Gandhi
World Suicide Prevention Day observed on 10th September.

जिन्हें जंग चाहिए, उन्हें हासिल होता है,
विनाश देख ख़ुशियाँ और अपने अहं की शांति ।
औरों को हासिल होता है दर्द और रक्तपात।
हम सबों को एक युद्ध…. लङाई… जंग लड़नी होगी ,
सभी लङाईयों को खत्म करने के लिये।
शांती लाने के लिये।

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ज़िंदगी की हर जंग में,
हर महाभारत में आश्वस्त हैं।
क्योंकि जीवन के
हर सैलाब में तुम्हें साथ
ले कर चल रहें हैं।
भरोसा है,
जब तुमने जंग दिया है
तो जय दिलाने सारथी
बन तुम आओगे हीं।

ज़िंदगी के जंग में
कुछ लोग टूटते नहीं।
क्योंकि, वे कई बार
टूट टूट कर बने होते हैं।
वे अपने खंडित अस्तित्व में
सुकून खोज़ लेते हैं।
अपनी आँखों की चमक
और मुस्कान में ख़ुशियाँ
ढूँढ लेतें हैं।
ज़िंदगी की थकान में
अपनी रौशनी बनाए रखना
सीख लेते हैं।
चोट के निशानों में
निखारना सीख लेते है।

ज़िंदगी में जंग
और ज़िंदगी से जंग
चलती रहती है.
अगर लड़ाई जारी रखो बिना डरे……
कोई साथ दे या ना दे तब भी ….
जीत मिल ही जाती है.

कहते है अपनों से हुए जंग हार जाना चाहिये,
पर बार-बार हारते हुए,
सामने वालो को भूल का एहसास ना दिलाने
अौर बस ढोते रहने से,
रिश्तों मे जो जंग लग जाती है
उसका क्या?
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