ना डरो,
जब चारो ओर गहन अँधेरा दिखे।
जब लगे, हो रहा सब ख़त्म।
तभी अंकुर निकलता है,
ऊपर बढ़ने के लिए।
रौशनी से होती है मुलाक़ात।
नीचे जड़े सहारा देने लगती हैं।
मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी भी।

ना डरो,
जब चारो ओर गहन अँधेरा दिखे।
जब लगे, हो रहा सब ख़त्म।
तभी अंकुर निकलता है,
ऊपर बढ़ने के लिए।
रौशनी से होती है मुलाक़ात।
नीचे जड़े सहारा देने लगती हैं।
मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी भी।

सुना था यह दुनिया है इक रंग मंच, हम सब है किरदार।
जीवन यात्रा में अलग-अलग हैं कहानियाँ और दास्तान।
कुछ मुकम्मल कुछ अधूरी।
सब की डोर है ऊपरवाले के हाथों में।
अब पढ़ा ट्रूमैन शो ऐसा वहम है,
जहाँ व्यक्ति अपने जीवन को रिएलिटी शो
का हिस्सा मान भ्रम में जीता है।
क्या हम सब वास्तव में रंग मंच के ऐसे हीं किरदार हैं,
जिन पर कई नज़रें टिकी हैं? …..
……जीपीएस ट्रेकिंग, कैमरे, सीसीटीवी,
ड्रोन, फ़ेसबुक, इंस्टग्राम, व्हाटअप…….
The Truman Show delusion or Truman syndrome, is a type of delusion in which the person believes that their lives are staged reality shows, or that they are being watched on cameras.
(In the film “The Truman Show,” Jim Carrey plays a man who is an unknowing star of a TV show. His life is streamed to an audience at all times).

हम सब जग में लोगों से रिश्ते बनाते हैं।
कभी अपने साथ प्रेम और इश्क़ भरा
रिश्ता बना कर देखो।
लोगों को अपने जीवन के
दायरे और सीमा बता कर देखो।
ग़र मन का सुकून चाहिए,
दूसरों के बदले खुद के लिए
जीवन जी कर देखो।
कई उलझनें ख़ुद-ब-ख़ुद सुलझने लगेंगी।

तन थके तो आराम चाहिए।
मन थके तो सुकून चाहिए।
“जो होगा अच्छा होगा”
मन के सुकून और शांति के लिए,
यह विश्वास क़ायम रखना है ज़रूरी।
कोशिश से बना सकते है यह यक़ीन।
गीता में छुपा है यह जीवन सार –
जो हुआ अच्छा हुआ।
जो हो रहा है वह अच्छा है।
जो होगा वह भी अच्छा होगा।

हमें मालूम है तुम्हें,
एक अरसा हो गया है ख़ुद से मिले।
दुआ देतें हैं, तुम्हें तुम जैसा कोई मिले।
उस आईने में,
अक्स से नज़रें मिला सको तो देखना
तुम्हें अपना व्यवहार
अपना किरदार नज़र आएगा। 
#TopicByYourQuote
मुलाक़ात न होने पाई थी
वक्त-ए- रुख़्सत ।
पर बंद आँखों से देखा था,
एक गहरी सी साँस और
तिरी गीली आँखों का झुक जाना,
क़तरे अश्क़ो का छलक जाना,
सूखे लबों का थरथराना।
तेरे हाथों का यूँ उठ जाना याद है
जैसे डूबने वाला हो कोई।
पर कहा नहीं तूने अलविदा
ये भी याद है।

ग़र किसी ने दूरियाँ बना ली,
गिला करने से पहले,
झाँक कर देखो गिरेबान में अपने।
कितनी बार रिश्तों के
फटे गिरेबाँ रफ़ूगर करे रफ़ू?
थक कर समझ गया,
बेहतर है अपनी
राह-ए-मंज़िल पर बढ़ जाना।




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