सच को जो झूठ बताए,
शोर मचा झूठ को सच बनाए।
सुन कर अनसुना करे,
ऐसे रिश्ते क्यों निभाएँ?
जाना नहीं उन राहों पर,
जहाँ मिले अपमान बारंबार।
जो बदले मौसम सा हर बार,
क्यों करना उस पर ऐतबार?

सच को जो झूठ बताए,
शोर मचा झूठ को सच बनाए।
सुन कर अनसुना करे,
ऐसे रिश्ते क्यों निभाएँ?
जाना नहीं उन राहों पर,
जहाँ मिले अपमान बारंबार।
जो बदले मौसम सा हर बार,
क्यों करना उस पर ऐतबार?

प्लास्टिक हीं प्लास्टिक है चारों ओर।
चाहे जितना मचा लो शोर।
आज धरा की ख़ुदाई में मिलते हैं प्राचीन अवशेष।
कुछ सौ साल बाद क्या रहेगा शेष?
ख़ुदाई में मिलेंगे क्या प्लास्टिक के मानव अवशेष?

मेरी माटी-मूरत पूजा तुम ने।
……सजाया-सँवारा,
दिया अपरिमित प्यार औ सम्मान
…..दस दिन।
कुछ अंश उसका रखा ना बचा कर?
मेरे जीते-जगाते, हाड़-मास …….
स्वरूप के लिए?
Inspired by an English quote!

जैसे चाहो, जी लो ज़िंदगी।
वापस लौटने की नहीं है गुंजाइश,
बस इतनी है शर्त-ए-ज़िंदगी।

लोगों की ओर जल कर गिरते, बिखेरते आतिशो ने,
रावण से पूछा ये क्या कर डाला?
जवाब मिला –
तुम सब युगों-युगों से जला रहे है मुझे।
मैंने भी वही किया, तो बुरा क्यों मान गए?
सामने राम तो नज़र आए नहीं कहीं।
पर छुपे थे कईयों के अंदर अंश हमारे, कई रावण।

दहलीज़ पर जलता दीया,
पाथेय बन राहें
उनके लिए रौशन है करता,
जिन्हें वापस आना हो।
ज़ो लौटें हीं ना
उनके लिए क्यों दीया जलाना
रात की दहलीज़ पर?

थे राधा बनने की चाह में।
कई नज़रें उठी,
सिर्फ़ लालसा भरी चाह में।
माँगा इश्क़ भरी नज़रें,
मिला बदन भर चाह।
समझ ना आया, तह-दर-तह
तह-ए-इश्क़ में सच्चा कौन, झूठा कौन?
और हर इल्ज़ाम इश्क़ पर आया।
पर कृष्ण ना मिले।
महादुर्गाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!

बँटवारा हो तब
ख़ुशियाँ तुम रख लो,
ग़म मेरे पास रहने दो।
अपने हिस्से की ख़ुशियाँ हम
ख़ुद रचेंगे, ख़ुद कमाएँगे।
अभी थोड़ी ख़ुशियाँ दे दो मुझे भी।
दुनिया को तुमसे मिले विरासत दिखाने के लिए।
चेहरे पर मुस्कान की मास्क लगा दुनिया
के सामने जाने के लिए।
बस इतनी सी है, तेरी मेरी कहानी।

topic by – yourQuote
उम्र-ए-रफ़्ता ना लौटे,
क्या फ़र्क़ है पड़ता?
उजालों का भी समय है ढलता।
सूरज भी है ढलता।
बस ज़िंदगी ख़ूबसूरत
और हो सुकून भरी।
यही है कामना।
उम्र-ए-रफ़्ता ना लौटे,
क्या फ़र्क़ है पड़ता?
The UN is marking IDOP by encouraging
countries to draw attention to and
challenge negative stereotypes and
misconceptions about older persons
and ageing, and to enable older persons
to realize their potential.
2022 Theme:Resilience of Older Persons
in a Changing World

ज़द्दोजहद में ज़िंदगी के,
थके, बेचैन दिन,
कट जाते है निशा के इंतज़ार में।
आ कर गुज़र जाती है रात भी,
किसी याद में।
रात की आग़ोश में,
थक कर सो जाते हैं ख़्वाब।
जागते रह जातें है
चराग़ और महताब…..चाँद।
जारी रहती है सफ़र-ए- ज़िंदगी।

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