मुस्कुराती आँखें सबके सामने
ग़ज़ब हैं झिलमिलाती सब के सामने।
चमक आँसुओं के नमी की है
या ख़ुशियों की है?
कैसे जानें?
नज़रों को पढ़ने वाले अब हैं कहाँ?

मुस्कुराती आँखें सबके सामने
ग़ज़ब हैं झिलमिलाती सब के सामने।
चमक आँसुओं के नमी की है
या ख़ुशियों की है?
कैसे जानें?
नज़रों को पढ़ने वाले अब हैं कहाँ?

दिल पर ना जाने कितना बोझ…
पत्थर सा लिए चलते है लोग।
कभी बह जाने दो यह दर्द और सोंच।
तब समझ आएगा दिल का मोल।
पत्थरों की प्रचंड नदियाँ,
झरने तभी बहते होंगे
जब पर्वतों के दिलों पर
बोझ हो जाते होंगे बेबर्दाश्त।

चाँद हो आग़ोश में,
तो सितारों से उल्फ़त नहीं करते।
रौशन हो जहाँ आफ़ताब से,
तो जुगनुओं की रौशनी पर नहीं मरते।


लोग क्या कहेंगे?
अगर सुन रहे हो लोगों की।
तब जी रहे हो उनकी ज़िंदगी,
उनकी बातें,
उनकी ख्वाहिशें।
अपनी ज़िंदगी कब जियोगे?


ज़िंदगी की कुछ अहम बातें है –
दिल औ दिमाग़ में ज्ञान भरने के लिए पढ़ना,
दिल औ दिमाग़ में भरे दर्द हटाने,
खाली करने के लिए लिखना।
बातों को समझने के लिए ज़िक्र औ चर्चा करना।
यादों से निकलने के लिए उनको समझना।
बातों को आत्मसात् करने के लिए पढ़ाना।
राज़-ए-दिल और दिल की बातें दिल में रखना।

चोट किसी की ख़्वाहिशों के
अन्दाज़ से नहीं भरता।
भरता है, अपने तरीक़े से,
अपने समय से।
कुरेदने से राख़ में दबी चिंगारी
आग भड़काती है फ़िज़ाओं में ।
अपने चोट, घाव ना कुरेद,
दो समय भरने का।
Wounds don’t heal the way we
want them to, they heal the way
they need to. It takes time to heal.
Be gentle with your wounds.

हम थे ख़फ़ा ख़फ़ा उन से।
और बेरुख़ी से वो चल दिए,
वहाँ जहाँ हम मना ना सके।
वफ़ा-जफ़ा, वफ़ाई-बेवफ़ाई,
के ग़ज़ब हैं अफ़साने।
ग़ज़ब हैं फ़साने।
हमें ऐतबार हीं नहीं रहा ज़माने पर।

गहरे सागर मंथन से अमृत मिला और गरल।
अपने अंदर के रौशनी-अंधकार समझ ऊपर उठना है,
अपनी भावनाओं-विकारों को देखना-समझना है,
तब दिल-औ-दिमाग़ का सागर मंथन है सबसे सरल।

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